बदायूं में रात 8:12 बजे होगा चंद्रोदय
बदायूं के पंडित गिरीश कुमार के अनुसार चतुर्थी, तिथि 28 अक्तूबर की रात 1:07 बजे शुरू होकर 29 अक्तूबर की रात 10:11 बजे तक रहेगी। चंद्रोदय रात 8:12 बजे होगा, चंद्रमा के दर्शन और अर्घ्य देने के बाद व्रत का पारण किया जाएगा।
पूजा के शुभ मुहूर्त
सुबह 6:20 से 7:40 बजे तक और सुबह 9:09 से 10:32 बजे तक पूजा का शुभ समय है। शाम की पूजा के लिए 5:30 से 7:11 बजे तक का समय बताया गया है। इस दिन वृष राशि में उच्च के चंद्रमा रहेंगे। तुला राशि में सूर्य, बुध और शुक्र की स्थिति के कारण लक्ष्मी-नारायण राजयोग और मालव्य योग बनेंगे। इन योगों को पर्व की पूजा के लिए विशेष माना गया है।
ऐसे करें पूजा और व्रत
सुबह स्नान के बाद व्रत का संकल्प लें। गौरी-गणेश, शिव-पार्वती और चंद्रमा का चंदन, अक्षत, धूप, दीप, फल, फूल और मिठाई से पूजन करें। दिन में मंत्रों व श्लोकों से भगवान का स्मरण करें। शाम को शुभ मुहूर्त में दोबारा पूजा कर माता को सुहाग की सामग्री और पकवान अर्पित करें। चंद्रमा निकलने पर करवे में जल, दूध और गुलाब जल मिलाकर अर्घ्य दें। इसके बाद छलनी से चंद्रमा और पति के दर्शन करें। पति के हाथ से जल ग्रहण कर व्रत खोलें और परिवार के बड़ों का आशीर्वाद लें।
भद्रा का असर नहीं
लखीमपुर खीरी के गोला के ज्योतिषाचार्य पंडित रामेदव मिश्र शास्त्री ने बताया कि करवाचौथ कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चंद्रोदय व्यापिनी चतुर्थी को रोहिणी नक्षत्र में मनाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि 28 अक्तूबर की शाम 5:31 बजे भद्रा लग गई और बृहस्पतिवार सुबह 4:27 बजे समाप्त हो गई। उनके मुताबिक, भद्रा का व्रत और पूजन पर असर नहीं पड़ेगा। शुक्र के पूर्व दिशा में होने से व्रत फलदायी होगा। जिले में शाम 7:57 बजे चंद्रोदय होगा। इसके बाद सुहागिनें चंद्रमा को अर्घ्य देकर पूजन करेंगी और व्रत का पारण करेंगी।