हिस्ट्रीशीटर पाताराम की बादशाहत को चुनौती देता रहता था करन
बरेली। बभिया का करन उर्फ छोटू यादव जिले के टॉप टेन अपराधियों में शामिल था। वह पुलिस का दुश्मन था और तमंचा तानने से लेकर गोली मारने में भी नहीं हिचकता था। सिपाही की हत्या के बाद पुलिस ने कई बार उसका एनकाउंटर करने की कोशिश की पर एक सजातीय नेता का वरदहस्त होने के चलते वह बचता रहा।
यूं तो शहर से सटे बभिया गांव का इतिहास ही अपराध और अपराधियों से भरा पड़ा है। पिछले साल बदमाशों की गैंगवार में मारे गए पाताराम की वजह से भी इस गांव का नाम खासा बदनाम रहा। यहीं का अविवाहित करन उर्फ छोटू कम उम्र में ही बड़ा बदमाश बनकर उभरा था। उसने कई बार पाताराम से सीधा मोर्चा लेकर उसकी बादशाहत को चुनौती दी थी। इसके बाद हत्या, लूट, डकैती की कई वारदातें कीं। वर्ष 2013 में उसने पकड़ने आई पुलिस टीम पर ही हमला कर दिया। उसकी गोली से सिपाही अनिरुद्ध यादव की मौत हो गई थी। हत्या कर वह एक सजातीय नेता की शरण में चला गया। पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी और एनकाउंटर की काफी कोशिश की पर वह बचता रहा। बाद में नेता ने ही उसे हाजिर कराया। जमानत पर छूटकर फिर से अपराध की दुनिया में उतर गया। दो साल पहले सीओ सिटी रहे कुलदीप कुमार ने उसे पकड़ने को टीम लगाई तो वह दरोगा और सिपाहियों पर तमंचा तानकर फरार हो गया। इसके बाद उसकी दहशत ऐसी फैली कि दो या तीन सिपाही भी सामने से गुजरते छोटू को गिरफ्तार करने की हिम्मत नहीं जुटा पाते थे। छोटू जुआ के फड़ से रकम लूटने के लिए चर्चित था। इसी वजह से उसका पाताराम से पहली बार झगड़ा हुआ था। तब उसने पाताराम के गुर्गों के ही जुआ के फड से रकम लूट ली थी। रंगदारी वसूलने के साथ ही वह अवैध खनन के धंधे से भी जुड़ा था।
2018 में खुली थी हिस्ट्रीशीट
करन 2017 में जेल से जमानत पर बाहर आया था। 17 जून, 2018 को कैंट थाने में उसकी हिस्ट्रीशीट खोली गई थी। फिलहाल उस पर 15 हजार का इनाम था। करन की बढ़ती आपराधिक गतिविधियों की वजह से एसएसपी इनाम बढ़ाने की संस्तुति करने वाले थे, इससे पहले ही मुठभेड़ हो गई।
मौत की तस्दीक पर अस्पताल में डेरा डाला
शुरू में एनकाउंटर को हल्के में ले रहे अफसर निजी अस्पताल में करन की मौत की पुष्टि के बाद सतर्क हो गए। इसके बाद एसपी सिटी से लेकर एसपी क्राइम और अन्य अफसरों ने निजी अस्पताल में डेरा डाल दिया। डॉक्टरों से पूछताछ की गई। काफी देर बाद मौत की घोषणा सार्वजनिक की गई। इसके बाद करन के परिवार को सूचना दी गई।
बभिया में लगाई पीएसी
करन की मौत के बाद किसी प्रतिक्रिया की आशंका में अफसरों ने बभिया गांव में पुलिस के साथ ही पीएसी लगा दी। देर रात करन का शव पोस्टमार्टम हाउस की मोर्चरी में रखवा दिया गया। रात एक बजे तक वहां उसके परिवार का कोई सदस्य नहीं पहुंचा था। पुलिस का कहना था कि करन का परिवार उसकी हरकतों से परेशान था, शायद इसलिए कोई नहीं पहुंचा, जबकि चर्चा थी कि परिवार को पुलिस ने ही नजरबंद कर दिया है। पुलिस नहीं चाहती कि एनकाउंटर के बाद किसी तरह का हंगामा हो।
कई बदमाशों की टांग में मारी गई गोली
पिछले साल जिले भर की पुलिस ने कई बदमाशों को पैर में गोली मारकर गिरफ्तार किया था। कई बदमाशों को दायें तो कई को बायें पैर में गोली मारी गई। कैंट पुलिस ने ही दो और बदमाशों से इसी तरह मुठभेड़ की। करन को भी बांये पैर में गोली लगी, यह अलग बात है कि उसकी मौत हो गई।