नोट बंदी के दौरान एसबीआई तथा अन्य बैंकों में पुराने नोट बदलने और अधिक धनराशि जमा किए जाने की जांच को आई सीबीआई टीम को काफी खामियां मिली हैं। इतना ही नहीं नकली करेंसी का भी खुलासा हुआ है। अधिक राशि जमा होने के बाउचर तथा अन्य दस्तावेजों की फोटो कांपी कराके यह टीम अपने साथ दिल्ली ले गई है। टीम ने नोटों की जानकारी चाही लेकिन इन नोटों के बाक्स में सील होने के कारण ठीक से पड़ताल नहीं हो पाई। इसलिए इन नोटों की गहनता से पड़ताल आरबीआई में कराने के बारे में सीबीआई की ओर से सिफारिश कराई जा सकती है। बरेली की स्टेट बैंक में जांच के दौरान क्या मिला तो इस बारे में सीबीआई टीम ने किसी भी तरह की प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की।
इनकम टैक्स से मिली जानकारी के आधार पर अधिक इनकम दिखाकर बरेली में जिन लोगों ने धनराशि जमा कराई थी। वह भी इस जांच के दौरान निशाने पर रहे। ऐसे लोगों की संख्या भी ढाई सौ से अधिक बताई गई है लेकिन उनके नामों को बैंक और सीबीआई दोनों ने गोपनीय रखा है। इनमें यह देखा जा रहा है कि दूसरे शहरों के बड़े लोगों के रुपयों को फर्जीखाते खोलकर तो जमा नहीं किया है। साथ में कितनी धनराशि पिछली तारीखों में जमा की गई है।
आरोप है कि कुछ निजी और सरकारी बैंकों में फर्जी आईडी से प्रतिबंधित नोट बदलने, बड़ी तादाद में चहेतों को नोट उपलब्ध कराने और नकली नोट ब्रांचों में जमा होने की शिकायतें रही हैं। आरबीआई और अफसरों ने भारी तादाद निजी बैंकों को भरपूर करेंसी उपलब्ध करायी थी, इसलिए निजी बैंकों में ज्यादा घपले हुए हैं। लेकिन वित्त मंत्रालय और आरबीआई ने सरकारी बैंकों में पहले जांच शुरू करायी है। बरेली जिला में 32 ब्रांचों की शिकायतें सामने आयी हैं।
बरेली आए सीबीआई की पांच सदस्यीय जांच टीम ने एसबीआई मेन ब्रांच और अन्य बैंकों में डेरा जमाया। तीस दिसंबर तक नोट जमा और बदलने की प्रक्रिया को परखा। टीम ने ब्रांचों पर बदले गए नोट, आरजीटीएस और बड़े लेनदेन संबंधी अभिलेख तलब किए। सूत्रों ने बताया कि निजी बैंकों में नकली नोट भी बड़ी तादाद में मिली भगत से जमा हुए हैं। इन दो दिनों तक बैंकों में स्टाफ की सांसे ऊपर नीचे होती रहीं।