बांकेगंज। दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन की भीरा रेंज के कांपटांडा वन क्षेत्र को टाइगर हैबिटैट के रूप में विकसित किया जाएगा। अब दुधवा टाइगर रिजर्व (डीटीआर) प्रशासन इसकी योजना बना रहा है। यह क्षेत्र दुधवा टाइगर रिजर्व और पीलीभीत टाइगर रिजर्व की सीमा पर शारदा नदी के कछार में स्थिति है। यहां बाघों के लिए जरूरी वेटलैंड के रूप में शारदा नदी बहती है। भोजन के रूप में यहां पर्याप्त शाकाहारी जीव भी हैं।
बफरजोन के उपनिदेशक डॉ अनिल कुमार पटेल ने शनिवार को भीरा रेंज की महराजनगर बीट के कांपटांडा वन क्षेत्र का भ्रमण किया। भ्रमण के दौरान उन्होंने पाया कि यह क्षेत्र बाघों के लिए अनुकूल प्राकृतवास है। यहां थोड़ा सा प्रयास करके बाघों की संख्या में इजाफा किया जा सकता है। अभी करीब 125 से 140 तक बाघ हैं। पीलीभीत टाइगर रिजर्व से सटे बफरजोन के इस क्षेत्र में पहुंचना कठिन होता है। इसके चलते डिप्टी डायरेक्टर को जंगल भ्रमण के लिए ट्रैक्टर का सहारा लेना पड़ा। उन्होंने पाया कि यहां बाघों के प्राकृतवास के लिए जरूरी उडलैंड और ग्रासलैंड के अलावा वेटलैंड भी है। बाघ वहीं ठहरते हैं, जहां उन्हें पर्याप्त भोजन और पानी मिलता है।
कांपटांडा क्षेत्र में बाघों के लिए बना माहौल
दो साल पहले तक भीरा रेंज उत्तर खीरी वन प्रभाग का हिस्सा था। 2017 में भीरा, मैलानी समेत उत्तर खीरी वन प्रभाग की सभी रेंजों को दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन में शामिल कर लिया गया। इसके बाद संरक्षण प्रयासों के चलते उत्तर खीरी वन प्रभाग के कांपटांडा समेत कई वन क्षेत्र डिस्टर्ब लेस हुए। इसके चलते वहां बाघों का हैवीटेट तैयार हो रहा है। अब दुधवा टाइगर रिजर्व ऐसे क्षेत्रों का चयन कर उसे टाइगर हैबीटेट के रूप में विकसित करने की योजना बना रहा है।
इससे ये होगें फायदे
दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन के भीरा रेंज के कांपटांडा वन क्षेत्र में वन भूमि के एक बड़े हिस्से पर अतिक्रमण है। इसके आसपास आबादी बसी हुई है, जहां शिकारी भी सक्रिय हैं। टाइगर हैवीटेट के रूप में विकसित हो जाने के बाद वन विभाग को यह अतिक्रमण हटाना आसान होगा। साथ ही सुरक्षा के इंतजाम बढ़ने से यहां शिकारियों की सक्रियता भी कम होगी।
अंतरराष्ट्रीय शिकारी लंबू फरियाद ने इसी इलाके में किया था 12 बाघों का शिकार
पिछले साल पकड़ा गया अंतरराष्ट्रीय शिकारी लंबू फरियाद ने वन अफसरों की पूछताछ में इसी इलाके में 12 बाघों का शिकार करने की बात स्वीकार की थी। इससे यह अनुमान लगाया जा सकता है कि यह क्षेत्र बफरजोन बनने से पहले बाघों के लिए सुरक्षित नहीं था।
बाघों का कॉरीडोर है कांपटांडा वन क्षेत्र
बफरजोन की भीरा रेंज का कांपटांडा वन क्षेत्र बाघों के कॉरीडोर के नाम से जाना जाता है। किशनपुर सेंक्चुरी, दुधवा नेशनल पार्क समेत पीलीभीत टाइगर रिजर्व के बाघ इस इलाके से आवागमन करते हैं।
कांपटांडा वन क्षेत्र को विकसित करने के लिए योजना बनाई जा रही है। पर्यटन की भीड़-भाड़ से दूर यह स्थल बाघों के लिए काफी मुफीद साबित हो सकता है। दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर को जल्द ही एक कार्ययोजना बनाकर भेजी जाएगी।
-डॉ अनिल कुमार पटेल, डीडी बफर जोन