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जिपं अध्यक्ष के लिए संजय, कल्पना और राजेश ने भरे पर्चे

Sat, 02 Jan 2016 01:09 AM IST
बरेली
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बरेली। जिला पंचायत अध्यक्ष के लिए सपा प्रत्याशी संजय सिंह के अलावा फरीदपुर के सपा विधायक सियाराम सागर की पुत्रवधू कल्पना सागर ने भी नामांकन कराकर चुनाव को रोचक और संघर्षपूर्ण बना दिया है। शुक्रवार को इन दोनों के अलावा बसपा जिलाध्यक्ष राजेश सागर ने भी नामांकन कराया लेकिन भाजपा प्रत्याशी मंजू देवी पर्चा खरीदने के बावजूद नामांकन कराने नहीं आईं।
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कलेक्ट्रेट में रिटर्निंग आफिसर डीएम गौरव दयाल के समक्ष सबसे पहले सुबह साढ़े 11 बजे नामांकन कराने सपा प्रत्याशी संजय सिंह पहुंचे। उन्होंने दो सेट में नामांकन कराया। उनके प्रस्तावक और अनुमोदकों में सपा जिलाध्यक्ष वीरपाल सिंह यादव के दामाद डॉ. जीराज सिंह और भतीजे विनोद यादव रहे। दूसरे पर्चे में तेजप्रकाश प्रस्तावक थे और राजकुमार यादव ने अनुमोदन किया। करीब 12 बजे बसपा जिलाध्यक्ष राजेश सागर ने नामांकन कराया। उन्होंने एक सेट में पर्चा भरा। इसमें अर्जुन सिंह प्रस्तावक और गीता देवी अनुमोदक थीं। सबसे बाद में नामांकन कराने पहुंचीं कल्पना सागर। फरीदपुर विधायक सियाराम सागर भी उनके साथ थे। कल्पना ने मुहूर्त के हिसाब से 2.45 बजे डीएम के समक्ष पर्चा दाखिल किया। उन्होंने एक सेट में ही नामांकन कराया। हालांकि दो सेट खरीदे थे। डीएम गौरव दयाल ने जांच के बाद तीनों के नामांकन स्वीकार कर लिए।

चार को वापसी, सात को चुनाव
बरेली। नामांकन और नामांकन पत्रों की जांच शुक्रवार को हो गई। तीनों प्रत्याशियों के पर्चे सही पाए गए। अब चार जनवरी को नाम वापसी की तिथि नियत है। इसके बाद सात जनवरी को कलेक्ट्रेट में ही मतदान के बाद मतगणना होगी।
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नाटकीय ढंग से भाजपा ने छोड़ा मैदान
- पहले से ही कयास लगाए जा रहे थे नहीं लड़ेगी भाजपा
- तय प्रत्याशी मंजू देवी ने नहीं कराया नामांकन
बरेली। जिला पंचायत के 15 सदस्य होने का लगातार दावा करने के बावजूद भाजपा चुनाव मैदान छोड़ गई। तय प्रत्याशी मंजू देवी नामांकन कराने ही नहीं पहुंचीं। हालांकि इस स्थिति के कयास पहले ही लगाए जा रहे थे। सपा प्रत्याशी संजय सिंह की पार्टी में मंजू देवी के पति मोहन सिंह के देखे जाने के बाद यह तय हो गया था कि अंदरखाने कोई खिचड़ी पक रही है, लेकिन भाजपा के दिग्गज कई बैठकें कर दावे करते रहे कि जीत हमारी होगी। आज उनके उस दावे की हवा निकल गई जब भाजपा जंग से पहले ही हार मानकर बैठ गई। हालांकि पर्चा न भरने के पीछे तरह-तरह के तर्क दिए जा रहे हैं।
 दोपहर तीन बजे तक कलेक्ट्रेट में अध्यक्ष के लिए नामांकन होने थे। दोपहर 12 बजे भाजपा के प्रदेश महामंत्री धर्मपाल सिंह को फोन लगाकर प्रत्याशी के नामांकन के लिए आने का समय पूछा तो बोले: मैं बाहर हूं। बहेड़ी के पूर्व विधायक छत्रपाल सिंह के साथ मंजू नामांकन कराने आएंगी। करीब एक घंटे बाद छत्रपाल सिंह को फोन लगाया गया तो उन्होंने अपनी पत्नी के अस्वस्थ्य होने की सूचना दी। बताया कि बरेली शहर से घर के लिए अचानक बहेड़ी लौट रहा हूं लेकिन मंजू देवी तो बरेली में ही हैं और वह अपने पति मोहन सिंह के साथ नामांकन कराएंगी। पौने तीन बजे तक वह नहीं आईं तो जिलाध्यक्ष राजकुमार शर्मा से पता किया गया। वह बोले:  मैं भी बाहर हूं लेकिन प्रत्याशी नामांकन नहीं कराएंगी। उन्होंने बताया कि मोहन सिंह से बात की थी। उन्होंने पार्टी के नेताओं के साथ न होने और प्रत्याशी तथा अनुमोदक न मिलने के कारण मैदान से हटने का मन बना लिया है। जिलाध्यक्ष की बात सही निकली। तीन बज गए और नामांकन का समय निकल गया लेकिन भाजपा प्रत्याशी ने पर्चा नहीं भरा। शाम को धर्मपाल सिंह ने बताया कि बहेड़ी के पूर्व विधायक छत्रपाल सिंह के प्रस्ताव पर ही मंजू देवी को प्रत्याशी बनाया गया था और छत्रपाल की पत्नी का निधन होने से यह स्थिति बनी। हालांकि उन्होंने कहा कि वह खुद नहीं समझ पा रहे हैं कि प्रत्याशी का मनोबल इतना कमजोर क्यों हुआ कि पर्चा भी नहीं भरा। आगे की रणनीति के सवाल पर बोले- कल तय करके बताएंगे। प्रत्याशी मंजू देवी के पति मोहन सिंह ने कहा कि सुबह पार्टी कार्यालय में मीटिंग हुई थी। बैठक में ही तय हो गया था कि चुनाव नहीं लड़ना है।
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