फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Bareilly News: जानलेवा हुआ डायरिया... चार माह में 513 बच्चे पीड़ित मिले, दो की मौत

Sun, 28 Jun 2026 12:22 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
विज्ञापन
विज्ञापन
बरेली। भीषण गर्मी और दूषित खानपान नौनिहालों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। जिला अस्पताल में बीते चार माह में डायरिया से पीड़ित 513 बच्चों को भर्ती कराया गया। इसमें से दो ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। एक बच्चे की चार जून को और दूसरे की 26 जून को इलाज के दौरान जान चली गई।
विज्ञापन

जिला अस्पताल की रिपोर्ट के अनुसार, मार्च से जून तक डायरिया के मरीजों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई। तभी से बच्चा वार्ड लगातार फुल चल रहा है। करीब दो सप्ताह पहले हुई बारिश के बाद गर्मी का असर कम होने पर मरीजों की संख्या घटी थी। अब स्थिति फिर पहले जैसी हो गई है। शनिवार को 28 बेड के वार्ड में दोपहर 12 बजे तक 25 बच्चे भर्ती मिले।डॉक्टरों ने बताया कि डायरिया का मुख्य कारण तेज गर्मी और दूषित खानपान रहा। छोटे बच्चों के शरीर में पानी की कमी होने के कारण उनकी हालत गंभीर हुई। समय पर इलाज न मिलने से उनकी जान पर भी बन आई। इसलिए बच्चे में डायरिया के लक्षण दिखें तो फौरन डॉक्टर को दिखाएं।
इन मासूमों ने गंवाई जान
सुभाषनगर के अंगूरी टांडा निवासी आमिर बानो ने अपनी पांच वर्षीय बेटी को उल्टी-दस्त होने पर चार जून को बच्चा वार्ड में भर्ती कराया था। बच्ची डायरिया की चपेट में मिली। अगले दिन सुबह साढ़े आठ बजे बच्ची ने दम तोड़ दिया। संजयनगर निवासी जगतपाल के दो माह के बेटे प्रेम को उल्टी-दस्त और बुखार की दिक्कत होने पर शुक्रवार शाम छह बजे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। यहां जांच में बच्चा डायरिया से ग्रसित मिला। उसका इलाज शुरू हुआ, लेकिन एक घंटे बाद ही उसने दम तोड़ दिया।
विज्ञापन



माहवार भर्ती बच्चों का ब्योरा
20 फरवरी से 19 मार्च तक : 26
20 मार्च से 19 अप्रैल तक : 69
20 अप्रैल से 19 मई तक : 208
20 मई से 19 जून तक : 210

ये लक्षण दिखें तो फौरन लें डॉक्टर की सलाह
बार-बार पतले दस्त होना, उल्टी और तेज बुखार आना, बच्चे में सुस्ती और कमजोरी होना।

गर्मी में बच्चों में डायरिया तेजी से फैलता है। इसके चलते मरीज लगातार बढ़ रहे हैं। शुरुआती लक्षण होने पर फौरन डॉक्टर की सलाह लें। लापरवाही जानलेवा हो सकती है। अस्पताल में संसाधन पूर्ण हैं। बच्चों की संख्या बढ़ने पर वार्ड में बेड बढ़ाए जाते हैं। - डॉ. रमेश दीक्षित, प्रभारी एडी एसआईसी, जिला अस्पताल
विज्ञापन

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें