बरेली। इज्जतनगर थानाक्षेत्र जमीन पर कब्जे के लिए 90 के दशक से ही बदनाम है। वर्ष 1990 से 2005 तक यहां यह हाल था कि पुलिस वालों को भी अपने प्लॉट की रखवाली करनी पड़ती थी। इसके बावजूद भूमाफिया उसे बेच देते थे। एक-एक प्लाॅट को यहां कई-कई बार बेचा गया है। प्लॉटों पर कब्जे व पुलिस के गठजोड़ के कारण ही इज्जतनगर थाना हमेशा चर्चित रहा।
इज्जतनगर थाने में पहले ग्रामीण इलाके ज्यादा थे। धीरे-धीरे यहां काॅलोनियां बसती गईं। इससे जमीन के दाम आसमान पर पहुंच गए। भूमाफिया खेतों को जबरन या धोखाधड़ी से अपने नाम करा लेते थे। इसके बाद किसी को बेच दिया जाता था। खरीदार को जब पता चलता था कि जमीन का मालिक कोई और है तो वह किसी अन्य को जमीन बेच देता था। इसी तरह से यहां जमीन को कई बार बेचने का खेल चलता रहता था। सबसे ज्यादा भूमाफिया इसी थाना क्षेत्र में हैं। जमीन कब्जाने के सबसे ज्यादा मुकदमे भी इसी थाना क्षेत्र में लिखे जाते हैं। जमीन के विवाद को लेकर पहले भी कई पुलिसकर्मी निलंबित भी हो चुके हैं।
जमीन के विवाद की वजह से इज्जतनगर पुलिस के भी वारे न्यारे थे। थाना पाने के लिए लखनऊ तक सिफारिश लगानी पड़ती थी। एक समय में इज्जतनगर थाने का इंचार्ज वहीं होता था, जिसकी लखनऊ तक पहुंच होती थी। हालांकि, भाजपा सरकार आने के बाद हालात में काफी सुधार हुआ है, लेकिन शनिवार को हुई घटना ने एक बार फिर से इज्जतनगर पुलिस की पुरानी छवि ताजा कर दी। संवाद