गाली-गलौज के विरोध पर किया हमला
इज्जतनगर के गांव में हुए बवाल को लेकर पुलिस के अलावा एक मुकदमा घायल व्यक्ति ने दर्ज कराया है। घायल के मुताबिक पुरानी रंजिश के कारण सुमित यादव, अनिल यादव, आशुतोष और नेत्रपाल उनके परिवार से जलन रखते थे। कुछ दिन पहले इन लोगों ने उनके भाई को हाथ-पैर तोड़ने की धमकी दी थी। सोमवार को वह घर आकर गाली दे रहे थे। विरोध करने पर घर में घुसकर पिटाई की गई। इसके बाद जान से मारने की धमकी देकर आरोपी भाग गए। इज्जतनगर थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है।
सात महीने से थी तनातनी, खुफिया अमले को नहीं लगी भनक
गांव में प्रधान व पूर्व प्रधान पक्ष में अरसे से तनातनी है। दोनों एक ही बिरादरी के हैं और इन्होंने दोनों समुदाय के एक-एक गुट को साध रखा है। पिछली साल 27 सितंबर को एक समुदाय का युवक दूसरे समुदाय की लड़की को ले गया था। लड़की की मां ने दूसरे समुदाय के तीन लोगों को नामजद कराते हुए इज्जतनगर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
मां ने युवक के भाई और चाचा पर पिटाई करने का आरोप लगाते हुए उन्हें भी नामजद कराया था। इस मुकदमे के बाद दोनों पक्षों में दुश्मनी और बढ़ गई थी। पुलिस संवेदनशील मामले को नहीं भांप सकी। होली और ईद पर पुलिस ने यहां अतिरिक्त सतर्कता नहीं बरती। पुलिस त्योहारों पर दोनों पक्षों को पाबंद करती तो शायद उपद्रव नहीं होता। इस मामले में मुखबिर तंत्र भी फेल साबित हुआ।
न फायरिंग के साक्ष्य मिले न तोड़फोड़ के
एसपी सिटी मानुष पारीक ने बताया कि सोशल मीडिया पर अफवाहें फैलाकर माहौल बिगाड़ने की कोशिश की गई। रात में कारतूस के खोखे पुलिस को दिए गए और गोली से लोगों के घायल होने की बात बताई गई। न तो कारतूसों से बारूद की गंध आ रही थी और न मेडिकल रिपोर्ट में गोली लगने के साक्ष्य मिले।
वहीं दूसरे पक्ष ने आधी रात के बाद घरों में तोड़फोड़ के फोटो वायरल कर विरोधियों पर आरोप लगाया है। जबकि रात से ही गांव में पुलिस तैनात थी तो कोई किसी के घर में घुसकर तोड़फोड़ कैसे कर सकता है। पूरा मामला कुछ लोगों के इशारे पर किया लग रहा है। इसकी जांच कर कार्रवाई की जाएगी।