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आईवीआरआई से बाहर निकला वायरस!

Sat, 16 Jan 2016 02:47 AM IST
बरेली
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बरेली/हाफिजगंज। घुरपका मुंहपका रोग के लिए जिम्मेदार एफएमडी वायरस अब आईवीआरआई से निकलकर गांवों में पहुंचने लगा है। शुक्रवार को हाफिजगंज इलाके के नरहरपुर गौरीखेड़ा गांव में तीन पशुओं की मौत के बाद से यह आशंका गहरा गई है। पशु चिकित्सा विभाग ने इन पशुओं का पोस्टमार्टम कराकर उनका सैंपल जांच के लिए लैब में भिजवाया है।
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नरहरपुर गौरीखेड़ा के किसान जगनाथ पुत्र गंगाराम ने के तीन पशुओं की मौत सुबह हो गई। जगनाथ ने बताया कि सुबह करीब चार बजे उसकी दो गाय और एक बछड़े की एक एक करके मौत हो गयी। एक साथ तीन पशुओं की मौत होने से किसान के होश उड़ गए। मौत की वजह जानने के लिए किसान ने थाने पर पहुंचकर पुलिस से पशुओं का पोस्टमार्टम करवाने की गुहार लगाई। थानाध्यक्ष धर्मेंद्र कुमार ने क्योलडिया पशु चिकित्सालय को अवगत कराया तो प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. पंकज गंगवार ने मौके पर पहुंचकर तीनों पशुओं का पोस्टमार्टम किया और उनके शरीर के कुछ हिस्सों तथा भूसे के सैंपल लेकर जांच के लिए लैब में भिजवाए हैं। चिकित्सा प्रभारी डॉ. गंगवार ने बताया कि पशुओें की मौत की वजह लैब में सैंपल की जांच से ही सामने आ सकेगी। उन्होंने कहा कि जांच रिपोर्ट जाने से पहले कोई आशंका व्यक्त नहीं की जा सकती। वहीं, इन पशुओं की मौत के बाद पशु चिकित्सा विभाग के अफसरों की आईवीआरआई से एफएमडी वायरस बाहर आने की आशंका को बल मिल गया है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. एसके वर्मा ने कहा कि जिस तरह से आईवीआरआई की टीमें बिना सूचना के शहर की डेयरियों और गांवों में पशुओं के सैंपल ले रही हैं, उससे जिले के गांवों में भी एफएमडी वायरस फैलने की पूरी संभावना बनी हुई थी। हालांकि उन्होंने कहा कि इन पशुओं के मरने का और भी कोई कारण हो सकता है इसलिए इससे पशु पालकों को घबराने की जरूर नहीं है।

क्रासर...
डीएम ने आईवीआरआई को लिखा पत्र
आईवीआरआई के निदेशक को पत्र लिखकर डीएम गौरव दयाल ने जिले में टीमें न भेजने के लिए लिखा है। कहा है कि आईवीआरआई के फार्म में वायरस फैला हुआ है और वहां से यदि टीम गांवों और डेयरियों में जाएगी तो बाहर भी वायरस फैल सकता है। बता दें कि पिछले दो दिनों तक आईवीआरआई की टीमों ने शहर की डेयरियों और कुछ गांवों में पशुओं के सैंपल लिए। इस पर एतराज जताते हुए पशु चिकित्सा विभाग के अफसरों ने कहा कि इससे आईवीआरआई का वायरस बाहर आ सकता है। वहीं, आईवीआरआई ने शुक्रवार को अबतक एकत्रित किए 35 सैंपल मुक्तेश्वर की लैब में जांच के लिए भेज दिया है। संयुक्त निदेशक डा. वीके गुप्ता ने बताया कि शहर की डेयरियों और कैंपस के फार्म के पशुओं के सैंपल भेजे गए हैं।
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खुरपका-मुंहपका की बीमारी से क्रॉस ब्रीड के पशु ज्यादा संक्रमित
अब आईवीआरआई के प्रवेश द्वारों पर बायो सिक्योरिटी
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली। आईवीआरआई में जिन पशुओं को खुरपका और मुंहपका की बीमारी हुई है, वो सभी क्रॉस ब्रीड के जानवर हैं। सामान्य जानवरों पर अभी एफएमडी वायरस अटैक नहीं कर पाया है। अभी ये जानवर सुरक्षित हैं।
आईवीआरआई में एफएमडी वायरस से 25 पशु सस्पेक्टेड पाए गए। इसमें से 14 पशुओं में वायरस पूरी तरह से फैल चुका है। इसमें खास बात यह है कि ये सभी क्रॉस ब्रीड हैं और सभी फीमेल हैं। आईवीआरआई में शोध करने के लिए क्रॉस ब्रीड ज्यादा तैयार की जाती हैं। इसमें भी सबसे ज्यादा फीमेल की संख्या सबसे ज्यादा रहती है। आईवीआरआई के पशुधन उत्पादन एवं प्रबंधन के कोऑर्डीनेटर डॉ. त्रिवेणी दत्त ने बताया कि सामान्य पशुओं की अपेक्षा क्रॉस ब्रीड के जानवरों में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। इसलिए, इनमें बीमारियां ज्यादा होती हैं। क्रॉस ब्रीड को रोग मुक्त रखने के लिए सबसे ज्यादा प्रयास होता है। इन जानवरों का इलाज कर बीमारी को नियंत्रित कर लिया गया है। आगे यह रोग न फैलने पाए, इसके लिए बायो सिक्योरिटी के इंतजाम हो गए हैं। अब कोई ट्रैक्टर भी बाहर से प्रवेश करता है तो उसके पहियों को (KMNO4) से साफ कर अंदर भेजा जाता है। आईवीआरआई के जानवर अब रिस्क जोन से बाहर हैं।
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