बरेली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर रेलवे ने आईवीआरआई ओवरब्रिज का अंडरपास शुरू करने की हामी भरी तो केंद्रीय केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार भी मीडिया के सामने अपने सर्वोच्च नेता की ओर से शहरवासियों को अंडरपास का गिफ्ट देने का एलान कर बैठे, लेकिन ऐन मौके पर रेलवे अफसर अपना वादा पूरा करने से मुकरे तो केंद्रीय मंत्री की भी बात खराब हो गई। और तो और मंगलवार को केंद्रीय मंत्री के दूत के तौर पर शहर विधायक डॉ. अरुण कुमार अंडरपास देखने पहुंचे और फिर वहां पूजा-पाठ कराकर लड्डू बांटे और खाए भी, लेकिन रेलवे अफसरों से यह पूछना भूल गए कि आखिर यह गिफ्ट मिलेगा कब।
पिछले सप्ताह रेलवे अफसरों के भरोसे केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार ने आईवीआरआई ओवरब्रिज का अंडरपास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन यानी 17 सितंबर को शहरवासियों के लिए खोल देने का एलान कर दिया था। अमर उजाला ने हालात का जायजा लिया तो पाया कि पूर्वोत्तर रेलवे के दावे में दम नहीं है। खबर छपी की तो रेलवे सिविल इंजीनियरिंग अनुभाग ने अंडरपास तेजी से तैयार कराने के लिए अतिरिक्त लोग लगाए लेकिन फिर भी मोदी जी के जन्मदिन पर शहरवासियों को गिफ्ट देने जैसे हालात नहीं बन पाए।
इधर, मंगलवार शाम को केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार के दूत के तौर पर शहर विधायक डॉ. अरुण कुमार, भाजपा नेता गुलशन आनंद आदि के साथ अंडरपास के निर्माण का जायजा लेने पहुंचे। उन्होंने अपनी टीम और रेलवे के अधिकारियों के साथ वहां विश्वकर्मा पूजा की और लड्डू भी खाए। इसके बाद अपनी टीम के साथ अंडरपास के भीतर चलकर जायजा लिया। अंडरपास के भीतर श्रमिक रंगाई-पुताई और निर्माण के दूसरे कामों में जुटे मिले। रेलवे अफसरों के साथ घंटों गुजारने के बाद भी शहर विधायक ने उनसे यह नहीं पूछा कि अंडरपास आखिर कब शुरू होगा।
अब कहा- अभी दो हफ्ते और लगेंगे
रेलवे अफसरों का कहना है कि अंडरपास को यातायात के लिए खोलने में अभी कम से कम दो हफ्ते का समय लग जाएगा क्योंकि सुरक्षा संबंधी कामों के साथ फाइनल टच बाकी है। तकनीकी मुआयना के बाद ही अंडरपास को आम लोगों के आवागमन के लिए खोला जा सकेगा। पीआरओ राजेंद्र सिंह का कहना है कि अंडरपास को कब से खोला जाना है इसकी तारीख अभी नहीं बताई जा सकती। दरअसल, अभी कई जरूरी कार्यों के साथ तकनीकी मुआयना भी बाकी है।