आईवीआरआई की ओर से आयोजित महिला पशुपालक कार्यक्रम में मझगवां विधान सभा क्षेत्र के अखा गांव में विश्व स्वास्थ्य दिवस पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यहां जितनी महिलाएं आई सभी घूंघट में थीं लेकिन यह घूंघट केवल परंपरा के तहत था। वे पूरी तरह से सजग हैं और अपने पति के साथ कंधे से कं धा मिलाकर चल रही हैं।
महिलाओं की जागरूकता की बानगी तब मिली जब आईवीआरआई की मेडिकल ऑफिसर डॉ. भारती ने पूछा कि कुत्ताें के काटने से कौन सी बीमारी होती है, तो पीछे हरी साड़ी में बैठी गीता ने झट से बताया रैबीज। इसी तरह खून की कमी से होने वाले रोग के बारे में पूछा गया तो गुड्डी ने सकुचाते हुए बताया कि एनीमिया। ऐसे ही दर्जनाें प्रश्न पूछे गए। महिलाआें ने सभी के सही जवाब दिये। गीता और गुड्डी ने बताया कि आशा व आंगनबाड़ी की दीदी से उन्हें बहुत सी जानकारियां मिलती रहती हैं। गांव के ही बुजुर्ग किसान बिहारी सिंह (68) बताते हैं कि पहले यह गांव हिस्ट्रीशीटरों का गांव कहा जाता था लेकिन अब ऐसा नहीं है। 63 वर्षीय नत्थु सिंह बताते हैं कि यहां की आबादी आठ हजार है। यहां एक मात्र स्कूल में 500 बच्चे कक्षा आठ तक पढ़ते हैं। महिलाएं पशुआें को पालती हैं और पुरुष खेती करते हैं। स्कूल जाने में बेटियों की संख्या अधिक है। डॉ. रनवीर सिंह बताते हैं कि इस गांव में आईवीआरआई ने खूब काम कराया है। इसी का परिणाम हैं कि लोग जागरूक हैं।