बरेली। वायरस, बैक्टीरिया के बदलते स्वरूप की निगरानी और उभरते रोगजनकों (पैथोजन) की पहचान के साथ विश्लेषण में अब भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) की क्षमता बढ़ गई है। पशु रोग शोध एवं निदान केंद्र में महामारी कोष समर्थित परियोजना के तहत अत्याधुनिक आयन जीन एस-5 नेक्स्ट जेनरेशन (सीक्वेंसिंग) प्रणाली स्थापित हुई है।
संयुक्त निदेशक कैडराड डॉ. सोहिनी डे ने बताया कि ये परियोजना खाद्य एवं कृषि संगठन के पशुपालन एवं डेयरी विभाग के सहयोग से और महामारी कोष के वित्तीय सहायता से चल रही है। इस प्रणाली से पशुओं में अचानक फैलने वाली बीमारियों और उनके प्रकोप की सटीक जांच करने, रोगों के प्रसार के पैटर्न को आणविक स्तर पर समझने, एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस के खतरों पर विस्तृत शोध में तेजी आएगी।
बताया कि प्रणाली की स्थापना थर्मो फिशर साइंटिफिक के विशेषज्ञ अभियंताओं ने दो दिन पूर्व की। एफएओ नई दिल्ली के पशु स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. मोहम्मद हसीब भी मौजूद रहे। यह प्रयास राष्ट्रीय रोग निगरानी एवं महामारी तैयारियों को सुदृढ़ीकरण की दिशा में सकारात्मक साबित होगा।