बरेली। रक्तदान से अनजान लोगों की जान बचती है। साथ ही, रक्तदाता भी संभावित बीमारियों के जोखिम से सुरक्षित होते हैं। इसकी पुष्टि ब्लड बैंक के आंकड़े कर रहे हैं। बीते वर्ष रक्तदान के बाद की गई जांच में 114 यूनिट खून संक्रमित मिला। सूचना पर संबंधित रक्तदाताओं ने अपना इलाज शुरू कराया।
जिला अस्पताल स्थित ब्लड बैंक के रिकॉर्ड के मुताबिक वर्ष 2023 में 2,722 लोगों ने रक्तदान किया था। इसके बाद विभिन्न चरणों में हुई सघन जांच में 114 यूनिट रक्त संक्रमित मिला। इसमें 28 यूनिट रक्त हेपेटाइटिस बी (एचबीएसएजी) से, 49 यूनिट हेपेटाइटिस सी (एचसीवी) से व 37 यूनिट वीडीआरएल (सिफलिस) से संक्रमित था। रिपोर्ट की जानकारी संबंधित रक्तदाताओं को गोपनीय स्तर पर कॉल कर दी गई। लिहाजा, समय रहते उन्होंने अपना इलाज शुरू कराया। ब्लड बैंक स्टाफ ने उनके स्वस्थ होने की संभावना जताई है।
ब्लड बैंक इंचार्ज डॉ. केपी सिंह के मुताबिक जब तक लक्षण न उभरें, लोग हेपेटाइटिस बी, सी, सिफलिस की जांच नहीं कराते। रक्तदान के बाद हुई जांच में संबंधित संक्रमण का पता चलने से जाहिर है कि इन रक्तदाताओं ने भी पूर्व में जांच नहीं कराई थी। जिला अस्पताल ब्लड बैंक में रक्तदान से पूर्व और बाद में होने वाली सभी जांचें निशुल्क होती हैं। निजी लैब में इन्हीं जांचों पर पांच हजार रुपये से ज्यादा खर्च होता है।
ब्लड बैंक के जनसंपर्क अधिकारी मनोज कुमार के मुताबिक रक्तदान से पूर्व ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, हीमोग्लोबिन, ब्लड ग्रुप, वजन की जांच होती है। रक्तदान के बाद हेपेटाइटिस बी, सी, ई, सिफलिस, एचआईवी, ह्यूमन टी लिम्फोट्रॉपिक (एचटीएलवी), मलेरिया, डेंगू, टाइफाइड, जेई, साइटोमेगलोवायरस (सीएमवी) समेत अन्य जांचें होती हैं।
- दान के बाद रक्त शोधन के लिए सेंट्रीफ्यूज होता है। यहां रेड ब्लड सेल्स, प्लेटलेट्स, प्लाज्मा में बांटते हैं।
- ब्लड टाइप/ग्रुप जांच फिर रक्त संक्रमण की गहन जांच होती है।
- ब्लड रीएक्टिव यानी प्रतिकूल मिलने पर नष्ट करते हैं। संक्रमण की गोपनीय सूचना रक्तदाता को दी जाती है।
- संक्रमण मुक्त लाल रक्त सेल्स को 6 डिग्री सेल्सियस पर 35 दिन, प्लेटलेट्स को पांच दिन व प्लाज्मा को लंबे समय तक फ्रीज कर सकते हैं।
- सुरक्षित रखे रक्त, प्लेटलेट्स, प्लाज्मा मरीज को चढ़ाने के लिए मांग के अनुसार दिए जाते हैं।