It is wrong to behave arbitrarily
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आनंद आश्रम में चल रही कथा में व्यास पीठ के पंडित रामदेव मिश्र ने भगवान श्री कृष्ण के प्राकट्य उत्सव की कथा का वर्णन किया। इसमें खास तौर से धर्म का अर्थ बताते हुए कथा व्यास ने कहा कि मनमाना आचरण करना अधर्म है।
उन्होंने कथा क्रम को आगे बढ़ाते हुए कहा कि भगवान का अवतार क्यों होता है। गीता में भगवान श्री कृष्ण अर्जुन से कहते हैं, यदा कदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत, अभ्युत्थानम् अधर्मस्य तदात्मानम् भ्रजाम्यहम्। जब संसार में धर्म की हानि होती है अधर्म बढ़ जाता है। तब भगवान अधर्म को मिटा कर धर्म स्थापना करते हैं। इसी कड़ी में उन्होंने धर्म की हानि के बारे में भी विस्तार से बताया।
इसके आशय में उन्होंने कहा कि हम सब धर्म को न मान कर मनमाना आचरण करते हैं। इसी का नाम अधर्म है। यह राक्षस कर्म है। अत: भगवान का अवतार होने से अधर्म का नाश होता है। राक्षस वृति का नाश होता है। कार्यक्रम में शमा गुप्ता, कंचन शर्मा, शशि मेहरा, सुमन गुप्ता, निशा मेहरोत्रा, सुभाष अग्रवाल, सर्वेश, सुरेश अग्रवाल का सहयोग रहा।