रेलवे के हर सेक्शन में स्टाफ की भारी कमी है। कर्मचारी हर महीने रिटायर हो रहे हैं, लेकिन नियुक्तियां नहीं की जा रही हैं। इसका सबसे खतरनाक असर रेलवे संरक्षा पर पड़ रहा है। कर्मचारियों की कमी के चलते स्टेेशनों पर ट्रेनों और रेल पथ की नियमित चेकिंग नहीं हो पाती है। बरेली जंक्शन पर रोज अप-डाउन लाइन पर 181 ट्रेनें गुजरती हैं। आठ रन थ्रू ट्रेनें हैं। स्टेशन पर कैरिज एंड वैगन विभाग में तैनात टेक्नीशियन ट्रेनें चेक करते हैं। ट्रैक मेंटीनेंस के लिए ट्रैक मैन और की मैन की ड्यूटी रहती है। दिन में सुबह पांच से आठ बजे और पूर्वाह्न 11 से शाम चार बजे तक कीमैन ट्रैक नियमित चेक होता है। ठंड में रात को ट्रैक मैन पेट्रोलिंग करते है। ठंड के दिनों में रेल फैक्चर की संख्या बढ़ जाती है जो हादसे का कारण बन रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक, नियमानुसार स्टेशन पर ट्रेन चेक करने को प्लेटफार्म के आखिर में दोनों ओर चार-चार टेक्नीशियन लगने चाहिए। ये टेक्नीशियन पहले चलते समय ट्रेन चेक करते हैं। ट्रेन रुकने पर पैदल आगे पीछे घूमकर कमियां देखते हैं। यहां 33 टेेक्नीशियन तैनात हैं। एक बार (आठ घंटे) 11 टेक्नीशियन की ड्यूटी लगती हैं। उनकी पहली जिम्मेदारी बरेली से जाने वाली या यहां से लौटने वाली ट्रेनों को चेक करने की होती है। स्टाफ की कमी के चलते कई बार यहां से गुजरने वाली ट्रेनों को चेक करने के लिए एक-दो टेक्नीशियन ही रह जाते हैं। इसी तरह की मैन और ट्रैक मैन की काफी कमी है।
अंग्रेजी हुकूमत में बने ट्रैक पर दौड़ रहीं ट्रेनें
वाया बरेली दिल्ली-लखनऊ ट्रैक अंग्रेजी हुकूमत में बना था। आजादी के बाद इंडियन रेलवे ट्रैक का मेंटीनेंस करता रहा। बावजूद इसके अभी बीच-बीच में छूटा कुल मिलाकर करीब 50 किलोमीटर ट्रैक पुराना है। पुरानी होने से पटरी कमजोर हो चुकी है। इससे आए दिन फ्रैक्चर होते रहते हैं जो कई बार डिरेलमेंट का कारण बन जाते हैं।
सालभर में चार बार डिरेलमेंट
बरेली। यहां जंक्शन यार्ड में एक ही स्थन पर चार बार डिरेलमेंट हो चुका है। नौ नवंबर को यहां जंक्शन पर यार्ड में यार्ड मैन दफ्तर के पास पानी लाइन से प्लेटफार्म एक पर जाते समय त्रिवेणी एक्सप्रेस की दो बोगी पटरी से उतर गई थीं। उसी शाम पांच बजे वही बोगी दोबारा पटरी से उतरीं थीं। जांच टीम अपनी संयुक्त रिपोर्ट मुरादाबाद मंडल कार्यालय को भेज चुकी है। सोमवार को मुरादाबाद मंडल कार्यालय में जांच टीमों के बयान दर्ज किए गए। डिरेलमेंट किस वजह से हुआ यह अभी तय नहीं हो सका। करीब छह महीने पहले इसी स्थान पर मालगाड़ी डिरेल हुई थी। करीब एक साल पहले यार्ड में उसी स्थान पर त्रिवेणी एक्सप्रेस की बोगी पटरी से उतरी थी। 11 नवंबर को बिशारतगंज स्टेशन के पास मालगाड़ी पटरी से उतर गई थी।
कड़ाके की ठंड और गर्मी में होते हैं डिरेलमेंट
बरेली। पूर्वोत्तर रेलवे इज्जतनगर मंडल वरिष्ठ मंडल इंजीनियर (समन्वय) वीके गुप्ता के मुताबिक 50 प्रतिशत से अधिक दुर्घटनाएं रेल अथवा वेल्ड फ्रेक्चर के कारण होती हैं। ठंड में रेल पटरी सिकुड़ने के कारण रेल फ्रेक्चर की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। दिसंबर और जनवरी में घना कोहरा होता है। ऐसी स्थिति में रेल पथ की गहन पेट्रोलिंग की जानी चाहिए। तेज गर्मी में रेल पटरी बढ़ने पर हादसे होते हैं।