भाजपा के प्रत्याशी चयन को लेकर मची अंदरूनी कलह और उसके बाद से 20 दिन में गड़बड़ाए जीत के सारे गणित सीएम योगी आदित्यनाथ की 19 घंटों की बरेली विजिट ने सीधे कर दिए। मुख्यमंत्री ने संगठन के सभी पदाधिकारियों तो कसा ही, सभी दिग्गजों, मंत्रियों, सांसदों और विधायकों को साथ बैठाकर मतभेद भी दूर करने का बड़ा काम भी कर दिया। बाकी कसर प्रशासनिक अमले को सीएम की की जीत की चिंता ने पूरी कर दी। अफसरों को समझ आ गया कि मुख्यमंत्री का 19 घंटे का बरेली ठहराव यदि सफल नहीं हुआ तो बाकी तमाम चीजें गतिमान हो सकती हैं। यही वजह रही कि प्रशासनिक व्यवस्था से असंतुष्ट विधायकों के खुले विरोध के बाद अब मतदान तक किसी को कहीं भी शिकायत का मौका नहीं मिला। आखिरकार उल्टे सारे गणित सीधे साबित हो गए।
टिकट बंटवारे पर पार्टी के कई दावेदारों और उनके समर्थकों के अलावा कई धड़ों के मतभेद किसी से छिपे नहीं हैं। बात संगठन से होते हुए संघ तक पहुंची थी और भाजपा प्रत्याशी को मुसीबतों का सामना करना पड़ा। टिकट फाइनल होने से लेकर मतदान के बीच तगड़ी मेहनत भी बेअसर होते देख सीएम का कार्यक्रम टलने की नौबत के बावजूद बरेली में रखवाने को जोर लगाया गया। मौके की नजाकत को भांपकर सीएम ने जनसभा के साथ डिनर, टी पार्टी के अलावा पार्टी, संगठन और दिग्गजों की बैठकें कीं। शहर की तमाम हस्तियों को 10-10 परिवारों को साथ ले जाकर वोट डलवाने का लक्ष्य भी दिया। इसी तरह जीत के हर गणित को साकार करने में सीएम ने कोई कसर नहीं छोड़ी। शुक्रवार को भाजपा के हाथ वापस आई मेयर की कुर्सी का श्रेय अधिकतर भाजपाइयों ने मुख्यमंत्री के दौरे को ही दिया। साथ ही प्रत्याशी उमेश के अपने दमखम की प्रशंसा भी कम नहीं रही।