फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ब्रांडेड से किनारा.. अब चक्की के आटे और चावल का सहारा

Mon, 12 Mar 2018 06:55 PM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली
विज्ञापन
विज्ञापन
आटे में मिलावट के ‘ज्वार-भाटा’ ने शहरवासियों को हिला डाला है। शहरवासी खासकर उच्च-मध्यम वर्ग के ब्रांडेड आटे से हाथ खींचने से बाजार लड़खड़ा रहा है। पूरे मामले पर मची हलचल को जाहिर न करने के बावजूद ब्रांडेड आटे वाले 20 से 25 फीसदी गिरावट तो स्वीकार ही रहे हैं। हालांकि स्टोर पर ब्रांडेड आटा हटा चुके व्यापारी इस गिरावट का अनुमान 30 से 40 फीसदी तक मान रहे हैं। स्टोर वालों के दावे में दम इसलिए भी नजर आता है क्योंकि चक्की वाले अपनी सेल पहले के मुकाबले 40 से 50 फीसदी तक बढ़ी बता रहे हैं। यानी ब्रांडेड की जगह चक्की पर पिसे आटे ने तेजी से ली है। गृहणियों का कहना है कि वे खुद गेहूं पिसवाकर आटा मंगा रही हैं। इस हलचल का दूसरा प्रमाणपत्र यह भी है कि आईटीसी की टीम दिल्ली-मुंबई से सर्वे और अपना पक्ष रखने को बरेली और यूपी में कई स्थानों पर कल पहुंच रही है। इसी के साथ बड़ी जानकारी यह भी है कि आटे की जगह लोगों ने चावल का इस्तेमाल बढ़ाया है। इससे चावल की खपत 10-15 फीसदी तक बढ़ गई है।
विज्ञापन

गली-मोहल्ले ही नहीं तहसीलों तक आटा में रबर जैसा खिंचाव होने की चर्चा होने लगी है। एक अलग ही लाइफ स्टाइल में रहने वाले लोग मल्टी नेशनल कंपनियों के आटा उत्पादों को इस्तेमाल कर रहे थे। ब्रांडेड आटा में रबर और प्लास्टिक जैसी शिकायतें किचिन में पहुंचीं तब मध्यम और उच्च वर्ग के लोगों ने नामचीन आटा पैकिंग को दरकिनार कर दिया। इन लोगों ने स्थानीय स्तर पर बेहतर गुणवत्ता वाला आटा अथवा सीध गेहूं पिसवाना शुरू कर दिया है। 

आईटीसी कंपनी की टीम बरेली में सर्वे करेगी, पक्ष रखेगी
आशीर्वाद आटा निर्माता कंपनी आईटीसी की टीम दिल्ली और मुंबई से सोमवार सुबह बरेली पहुंच रही है। टीम थोक विक्रेताओं के अलावा रिटेलर्स से भी बातचीत करेगी। इसके अलावा चुनिंदा उपभोक्ताओं के सामने अपना पक्ष भी रखेगी। आईटीसी के स्थानीय प्रमुख कपिल ने बताया कि टीम प्रशासन और एफएसडीए अफसरों से मुलाकात कर स्थिति स्पष्ट करेगी।
विज्ञापन


मिल वालों का दावा- हाईटेक मशीनों में मिलावट की गुंजाइश नहीं
स्थानीय मिनी फ्लोर मिल संचालकों का दावा है कि उनके प्लांट पर किसी भी तरह की मिलावट की गुंजाइश ही नहीं है। गोपाल भोेग निर्माता मोहित ऐरन ने बताया कि आटा में गिलोटिन की न्यूनतम मात्रा छह प्रतिशत तक मान्य है लेकिन अच्छे आटा में 10 से 12 प्रतिशत तक इसकी मौजूदगी पाई जाती है। मोहित ने बताया कि उनका प्लांट आधुनिक एवं हाईजीनिक है। इसके सिस्टम में गेहूं के अलावा कोई अन्य कण या पदार्थ आ ही नहीं सकता क्योंकि मशीन उसको अलग कर देती है। इसलिए उनके उत्पाद में किसी तरह की कोई मिलावट नहीं है।

लोग बोले...

हम लोग वर्षों से आशीर्वाद आटा इस्तेमाल कर रहे थे। पिछले कुछ दिनों से इसमें रबर जैसा अजीब ही खिंचाव देखने को मिला। सोशल मीडिया पर भी तमाम खबरें चल रही हैं। इसके चलते इस्तेमाल बंद कर दिया है।
- मीरा, महानगर


आशीर्वाद और नेचर फ्रेश जैसे ब्रांड का आटा हमारे घर में इस्तेमाल होता था। मगर कुछ दिनों से इसे गूंथने पर खिंचाव देखने को मिल रहा था। दुकानदार से बातचीत की लेकिन उसने भी कुछ ठीक बात नहीं बताई तो अब गेहूं खरीदकर पिसवाए हैं।
- पिंकी, नया टोला


ब्रांडेड आटा को लेकर घर में महिलाओं ने बताया कि कुछ दिनों से आटा अच्छा नहीं आ रहा। गूंथने के बाद आटा ऐंठने लगता है। रोटी के स्वाद में भी बदलाव महसूस हुआ तो हमने लोकल ब्रांड चक्की का आटा लेना शुरू कर दिया है।
- श्याम कपूर, सिविल लाइंस


कुछ दिनों से आटा गूंथने के बाद रबर की तरह खिंचने लगा था। आसपास की कुछ महिलाओं ने भी इसी तरह की बात कही। समाचारपत्रों में भी गड़बड़ी की खबरें आईं। इसके चलते अब हम चक्की से आटा मंगाते हैं। 
- अर्चना, रामपुर बाग

हमारा कारोबार बढ़ा
चक्की आटा कारोबारी का कहना है कि आशीर्वाद, नेचर फ्रेश जैसे नामचीन आटा में मिलावट और गड़बड़ी की खबरें प्रसारित हुईं तो ग्राहकों का रुख चक्की आटा की ओर बढ़ने लगा है। मढ़ीनाथ के वंश गिरि चक्की वालों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से ग्राहक बढ़े हैं। मांग डेढ़ गुनी तक हो गई है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें