महेश की हत्या 23 मई की रात उनके ही घर में सोते समय सिर कुचलकर कर दी गई थी। ममता ने लूटपाट के दौरान बदमाशों के हाथों महेश की हत्या किए जाने की बात कही थी। बाद में ममता पर ही हत्या करने का शक गया। पूछताछ से पता चला कि ब्याज पर रुपये उधार देने वाले महेश से ममता खफा रहती थी, क्योंकि वह ममता को खर्चे के लिए रुपये नहीं देते थे। ममता को 26 मई को गिरफ्तार करने के बाद अगले दिन जेल भेज दिया गया था।
मां को जेल जाता देखकर बेटा साजन (8) और बेटी रिचा (4) फफककर रो पड़े थे। तब उन्होंने दोनों बच्चों की देखरेख का जिम्मा संभालना तय किया। दोनों बच्चों को कपड़े दिलाए और राशन का इंतजाम किया। साजन पहले से संत श्रीहरिदास बाबा शिशु मंदिर स्कूल में कक्षा तीन का छात्र है। रिचा नहीं पढ़ती थी, उसका भी दाखिला इसी स्कूल में करा दिया। रिचा को किताबें, नई ड्रेस, जूते-मोजे भी दिलाए।
हरेंद्र सिंह ने रामपुर के स्वार थाने में तैनाती के दौरान भी सात साल की गुनगुन को पढ़ाने की जिम्मेदारी ली थी। वह सड़क किनारे मिट्टी के बर्तन बेचा करती थी। लॉकडाउन के दौरान उसका परिवार मुसीबत में था। पिता बीमार थे। उसकी पढ़ाई छूट गई थी। तब इंस्पेक्टर ने उसका दोबारा दाखिला कराया था और अब भी वह उसकी फीस दे रहे हैं।