जांच रिपोर्ट में इंस्पेक्टर पर लगे आरोप खारिज
तत्कालीन सीओ तृतीय आशीष प्रताप सिंह ने इस मामले में जांच की जो तत्कालीन प्रेमनगर थाना प्रभारी राजेश प्रताप सिंह की विवेचना में एफआर का आधार बनी। इसमें राघवेंद्र सिंह को क्लीनचिट देते हुए बताया गया कि इंस्पेक्टर ने इस तरह का कोई कृत्य नहीं किया था। साथ ही लिखा कि संबंधित दिन व समय की कोई वीडियो रिकॉर्डिंग या फुटेज नहीं मिली। सीसीटीवी टेक्नीशियन से वार्ता की गई तो पता लगा कि डाटाबेस क्रैश हो गया है।
समाजसेविका ने बताया कि पुलिस ने साजिशन डाटाबेस क्रैश होने की कहानी गढ़ी है। विवेचक ने उनका और उनके साथ मौजूद लोगों का बयान तक नहीं लिया। उन्हें एफआर लगने की जानकारी तक नहीं दी गई। कोर्ट के स्तर से जानकारी हुई है। कोर्ट में एफआर पर आपत्ति दाखिल की है, नौ फरवरी को तारीख लगी है। आरोपी को सजा दिलाने के लिए आखिरी सांस तक संघर्ष करूंगी।