बरेली। बचपन में मां के साथ स्कूल जाने वाली अनमता जावेद को शायद तब अंदाजा भी नहीं था कि वही अनुभव आगे चलकर उनके जीवन का उद्देश्य बन जाएगा। बड़ा बाजार की रहने वाली अनमता वर्ष 2016 से आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद बच्चों को निशुल्क शिक्षा दे रही हैं। अब तक वह 200 से अधिक बच्चों को शिक्षित कर चुकी हैं।
अनमता बताती हैं कि उनकी मां गजाला एक चैरिटी स्कूल में पढ़ाती थीं। बचपन में वह अक्सर मां के साथ स्कूल जाती थीं। वहां कई बेहद गरीब परिवारों के बच्चे आते थे जो फीस न भर पाने की वजह से पढ़ाई में कठिनाइयों का सामना करते थे। उन बच्चों की स्थिति देखकर वह भावुक हो जाती थीं। धीरे-धीरे उन्होंने ऐसे बच्चों को अपने घर पर ही निशुल्क पढ़ाने लगीं। यही पहल समय के साथ उनका संकल्प बन गई और आज भी वह जरूरतमंद बच्चों को मुफ्त शिक्षा देकर उनके भविष्य को संवारने का प्रयास कर रही हैं।
विरोध झेला, शिक्षा का संकल्प नहीं छोड़ा
बरेली कॉलेज से एलएलबी की पढ़ाई कर रहीं अनमता बताती हैं कि शुरुआत में रिश्तेदारों और मेरे समुदाय के कई लोगों ने विरोध किया। सबका कहना था कि अपना समय मुफ्त में क्यों दे रही हो। समाज सुधारक बनकर क्या मिलेगा। कुछ लोग तो घरवालों को भी भड़काते थे, लेकिन अनमता ने हार नहीं मानी। पहले वह बच्चों को घर पर बुलाकर पढ़ाती थीं, फिर उन्होंने बच्चों के घर जाकर उनको पढ़ाना शुरू कर दिया। वह बताती हैं कि उनके इस सेवा कार्य में माता-पिता का बहुत सहयोग रहा।
युवाओं को भी कर रही हैं जागरूक
वह माॅय भारत, एनएसएस और आर्ट ऑफ गिविंग के माध्यम से भी समाजसेवा के कार्यों में सक्रिय हैं। कोविड-19 के दौरान उन्होंने जरूरतमंद परिवारों तक भोजन पहुंचाने में भी योगदान दिया। वर्तमान में वह सड़क सुरक्षा मित्र के रूप में लोगों को यातायात नियमों के प्रति जागरूक कर रही हैं। युवाओं को समाजसेवा से जुड़ने के लिए प्रेरित कर रही हैं।