बरेली। सीसीडी यानी कैफे काफी डे के संस्थापक वीजी सिद्धार्थ की आत्महत्या के बाद उद्योग जगत में सदमे का माहौल है। उद्योग जगत से जुड़े लोग सिद्धार्थ के इस कदम से तो नाइत्तफाकी जता रहे हैं लेकिन यह भी कह रहे हैं कि इसके लिए उन्हें सिस्टम और बैंकिंग प्रणाली ने मजबूर किया। उनका कहना है कि खराब सिस्टम सही होने में समय लगेगा, इसलिए सरकार को ही औद्योगिक क्षेत्र से निराशाजनक माहौल को दूर करने के लिए प्रभावी कदम उठाए। क्योंकि इस घटना ने सिर्फ एक उद्यमी को नहीं बल्कि पूरे तंत्र और उससे जुडे़ रोजगार को भी प्रभावित किया है। कारोबारियों ने कहा कि उद्योग सिर्फ एक व्यक्ति से नहीं चलाता, इसमें तमाम श्रमिक भी शामिल हैं। अगर सिस्टम हर कारोबारी से नीरव-माल्या जैसा बर्ताव करेगा तो औद्योगिक वातावरण नष्ट होना तय है।
कारोबारी कहते हैं कि खेतों से ग्राहक तक पहुंचने का सपना संजोने वाले सिद्धार्थ की आत्महत्या से हजारों लोग खुद ही मर गए हैं। बरेली मंडल में भी ऐसे तमाम बड़े कारोबारी हैं जो उतार-चढ़ाव के दौर से गुजर रहे हैं। ऊपर से खुश दिखने वाले इन कारोबारियों की असल जिंदगी में काफी हलचल है। कारोबारी को विषम परिस्थितियों का सामना करने के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए। सरकारी सिस्टम में तमाम ऐसे लोग हैं जो औद्योगिक माहौल को खराब और बर्बाद करना चाहते हैं। छापा कार्रवाई हो या फिर अन्य प्रक्रिया, हमेशा रोजगार देने वाले उद्यमी और कारोबारी को ही परेशान किया जाता है। जरा सी गलती पर उद्यमी दंडित कर पूरे समाज में बदनाम कर दिया जाता है। सरकारी तंत्र में खामी और उससे होने वाली गलती पर कोई कार्रवाई तक नहीं होती है। यही हाल बैंकिंग सिस्टम में है। उनका है कि हर उद्यमी को एक ही नजरिया से देखना गलत है। बैंक वाले इन दिनों मनमानी कर रहे हैं, करीब सभी कारोबारी परेशान है, इसका प्रभाव आगामी दिनों में पड़ेगा। कुछ कारोबारियों से बातचीत के अंश प्रस्तुत हैं।
फोटो: दिलीप खंडेलवाल
इन दिनों उद्योग जगत सीसीडी की घटना से क्षुब्ध है। वैसे उद्यमी को साहस के साथ हर समस्या का सामना चाहिए। आत्महत्या कोई समाधान नहीं है। सरकार भी ऐसी घटनाएं रोकने को सिस्टम सुधारे और प्रभावी कदम उठाए।
- दिलीप खंडेलवाल, उद्यमी
उद्योग अब सिस्टम से ही चलेगा, जुगाड़ करने वाले जमीन पर आ जाएंगे। बैंक का लोन भी पब्लिक का पैसा है। लोन का इस्तेमाल भी उसी मद करना चाहिए जिसके लिया गया है। इधर-उधर लगाने से कामकाज प्रभावित तो होंगे ही।
- रजत शर्मा, निदेशक, एनपी एग्रो
वीजी सिद्धार्थ की घटना से पूरा कारोबार जगत दहशत में आया है। लेकिन किसी समस्या आत्महत्या तो नहीं है। कारोबार करने में तमाम कठिन दौर आते हैं, उनसे निपटने वाला की सफल कारोबारी होता है।
- रमनदीप सिंह, क्रेडाई
कोई भी कारोबार सरकारी और बैंक मदद के कराना संभव नहीं होता। कारोबार शुरू करने के लिए लोग निवेश करते हैं। वह कभी नहीं चाहते हैं कि धंधा चौपट या ठप जाए। कामकाज में गलतियां होती हैं, समस्याएं भी आती हैं। इनका समाधान सुसाइड नहीं है।
- राजू खंडेलवाल, आईआईए
व्यापार को अपने चादर में ही करना चाहिए। लेकिन सीसीडी प्रमुख को ऐसा कदम नहीं उठाना चाहिए था। इस घटना से कारोबारियों का मनोबल टूटा है। घाटे में आने वाले उद्योगाें की मदद करने के लिए कारगर योजना बनाए।
- अनुपम कपूर, कारोबारी
सीसीडी प्रकरण से उद्योग जगत क्षुब्ध है। सुसाइड समस्या का समाधान नहीं है। इससे अन्य लोग और उनकी फर्मों से जुड़े कारोबारी प्रभावित होंगे। सरकार ऐसे मामलों पर अंकुश लगाने को कुछ करे।
- अजय शुक्ला, उद्यमी