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Bareilly News: औद्योगिक क्षेत्रों में डीजल के भरोसे कारखाने, जनरेटरों से मुनाफा गायब

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बरेली। बुधवार को आंधी-बारिश से ध्वस्त बिजली व्यवस्था 24 घंटे बाद दुरुस्त हुई तो बृहस्पतिवार को फिर तेज हवा से फाॅल्ट, ट्रिपिंग जारी रही। औद्योगिक क्षेत्रों में 24 घंटे तक उद्योग, कारखाने जनरेटर के भरोसे रहे। पीएनजी की बढ़ती कीमत, व्यावसायिक एलपीजी की सीमित उपलब्धता के बीच बिजली की प्रभावित आपूर्ति से उद्यमी जूझ रहे हैं। इस स्थिति में फैक्टरियाें में उत्पादन ठप होने की आशंका जताई जा रही है।
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परसाखेड़ा और सीबीगंज औद्योगिक क्षेत्र में बुधवार से बिजली आपूर्ति ठप होने से करीब दो सौ उद्योगों में उत्पादन प्रभावित रहा। सेंट्रल यूपी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष राजेश गुप्ता के मुताबिक विद्युत निगम की नई वर्टिकल व्यवस्था में पुरानी टीम को सात बिजली उपकेंद्र को संभालना पड़ रहा है। पूर्व में ये टीम दो उपकेंद्र देखती थी। इसमें छह लाइनमैन, एक जेई, एक एसडीओ, एक एक्सईएन होते थे। नई व्यवस्था में स्टाफ सीमित है पर उपकेंद्र बढ़ गए। फॉल्ट, ट्रिपिंग ठीक करने में घंटों लगते हैं। दिन और रात में एक-एक लाइनमैन, हेल्पर की टीम रहती है।
स्टाफ कमी का मुद्दा जिला उद्योग बंधु, मंडलीय उद्योग बंधु, बिजली नियामक आयोग के अध्यक्ष, मध्यांचल विद्युत वितरण निगम के अधिकारियों के समक्ष उठाया जा रहा है लेकिन अभी पुख्ता सुधार नहीं हुआ। बिजली आपूर्ति दुरुस्त हो तो डीजल, एलपीजी, पीएनजी पर निर्भरता कम होगी।
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कारखानों में न्यूनतम 50 किलोवाट के लगे हैं जनरेटर
उद्यमियों के मुताबिक उत्पादन के अनुसार उद्योगों में 100 से लेकर 500 और इससे अधिक क्षमता के भी जनरेटर का प्रयोग होता है, ताकि प्रोसेसिंग लाइनों का संचालन दुरुस्त रहे। औसतन दो सौ केवी जनरेटर घंटे भर चलाने पर पांच हजार रुपये का डीजल लगता है। 24 घंटे बिजली आपूर्ति प्रभावित होने से चारों औद्योगिक क्षेत्र में कारखाना संचालन पर अनुमानित एक से डेढ़ करोड़ रुपये का डीजल फुंका।

अफसरों का फोन रहता है बंद, कोल्ड चेन यूनिट प्रभावित
आइसक्रीम यूनिट संचालक हिमांशु अग्रवाल के मुताबिक ट्रांसपोर्ट नगर में अभी तक बिजली आपूर्ति दुरुस्त नहीं हो सकी। अफसरों का फोन बंद रहा। उन्होंने हरुनगला के बजाय नकटिया केंद्र से लाइन जोड़ने की मांग की है। कोल्ड स्टोरेज एसोसिएशन अध्यक्ष हरि प्रकाश अग्रवाल के मुताबिक बिजली जाने पर तापमान नियंत्रण के लिए जेनरेटर का संचालन करना पड़ता है। जो महंगा पड़ता है। इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के चैप्टर चेयरमैन मयूर धीरवानी के मुताबिक बुधवार को प्रभावित आपूर्ति दुरुस्त हो गई पर फाल्ट, ट्रिपिंग की अड़चन अभी है।
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