बरेली। क्षय रोग (टीबी) के मरीजों की देखभाल और जाने-अनजाने दूसरों से मिलने के दौरान बचाव के उचित उपाय न होने से परिजन और करीबी भी क्षय रोग की चपेट में आ रहे हैं। अब तक जिले में सात सौ से ज्यादा लोगों में इसकी पुष्टि हो चुकी है।
क्षय रोग केंद्र से प्राप्त जानकारी के अनुसार क्षय रोग माइक्रोबैक्टेरियम ट्यूबरक्लोसिस जीवाणु की वजह से होता है। यह रोग हवा के माध्यम से फैलता है, क्योंकि जब कोई व्यक्ति खांसता, छींकता और बोलता है तो उसके साथ जीवाणु महीन बूंदों के रूप में बाहर निकलते हैं। जो हवा से किसी अन्य व्यक्ति को संक्रमित कर सकते हैं। सात सौ से ज्यादा बच्चों, परिजन और करीबियों के संक्रमित होने की एक वजह ये भी होने की आशंका से इन्कार नहीं कर सकते।
बताया कि जो बच्चे चपेट में मिले हैं, उनमें से कई के माता-पिता संक्रमित रहे हैं। वहीं, अन्य लोग किसी अन्य मरीज के संपर्क में आए होंगे। हालांकि, चपेट में आने वाले सभी मरीजों का इलाज हो रहा है। उन्हें दवाएं दी जा रही हैं। दवा का सेवन कर रहे हैं या नहीं, निगरानी भी की जा रही है।
निक्षय पोर्टल पर अपलोड हो रहा डाटा
स्वास्थ्य विभाग की ओर से टीबी मरीजों का डाटा निक्षय पोर्टल पर अपडेट किया जाता है। पूरे वर्ष को त्रमासिक चार क्वार्टर में बांटा है। जनवरी से मार्च पहला और अप्रैल से जुलाई दूसरे क्वार्टर का डाटा अपलोड हुआ। यहां आयुवर्ग के अनुसार मरीजों की जानकारी दी गई है। जो 15 वर्ष तक और इस आयुवर्ग से अधिक दो श्रेणियों में हैं। 15 तक की श्रेणी में बच्चे और किशोरों की संख्या 712 है। जिले में 10,362 मरीज सक्रिय हैं।
सावधानी का अभाव ही बीमारी की वजह
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. इंतजार हुसैन के मुताबिक क्षय रोग फैलने का मुख्य कारण मरीज की पहचान होने में देरी और दूसरा मरीजों द्वारा खांसते, छींकते, बातचीत के दौरान सुरक्षा मानक दरकिनार करना होता है। वहीं, स्कूल जा रहे किसी बच्चे को टीबी है तो साथ बैठने, खेलने और मिलने-जुलने वाले बच्चे भी चपेट में आ सकते हैं।
बढ़ रहा टीबी पीड़ित बच्चों का आंकड़ा
स्वास्थ्य विभाग की दो क्वार्टर में जारी रिपोर्ट पर गौर करें तो प्रतिवर्ष टीबी की चपेट में आने वाले बच्चों का आंकड़ा बढ़ रहा है। वर्ष 2021 में 412, 2022 में 549, 2023 में 699, 2024 में 712 बच्चे चपेट में मिल चुके हैं। वहीं, मरीजों की देखभाल कर रहे जिले के 63 लोगों में टीबी के संदिग्ध लक्षण मिले। इनकी जांच में छह लोग में रोग की पुष्टि हुई। यह आंकड़ा संक्रमितों की कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग के दौरान सामने आया। ब्यूरो