बरेली। रुहेलखंड विश्वविद्यालय के आईपीआर (बौद्धिक संपदा) सेल की ओर से ''''इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स : एप्लीकेशन ऑन इनोवेशन'''' विषय पर एकदिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन शनिवार को किया गया। इसमें मिनिस्ट्री ऑफ न्यू एंड रीन्युएबल एनर्जी के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. अरुण चौधरी ने बताया कि कार्बन उत्सर्जन में भारत की स्थिति अन्य देशों से बेहतर है। यहां का कार्बन उत्सर्जन विकसित देशों की तुलना में काफी कम है।
कुलपति प्रो. केपी सिंह ने बताया कि छात्र स्वयं पेटेंट करवाकर बौद्धिक संपदा को सुरक्षित करा सकते हैं। वर्ष 2022 से अब तक विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने 203 पेटेंट फाइल किए हैं। आलोक गुप्ता ने पेटेंट की नीतियों की जानकारी दी। इस दौरान मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के अध्यक्ष डॉ. मनोज कुमार सिंह, डॉ. इंद्रप्रीत कौर, फरकुंदा रहमान, प्रो. शोभना सिंह, डॉ. अनीता त्यागी, प्रो. अर्चना गुप्ता, डॉ. ज्योति पांडेय, प्रो. आलोक श्रीवास्तव, प्रो. पीपी सिंह, प्रो. सलीम खान आदि मौजूद रहे। संवाद