पूरा देश आजादी की 70वीं वर्षगांठ मनाने की तैयारी कर रहा है। सरकारें विकास के दावों का गुणगान करने में जुटी है लेकिन जिले में 440 गांव ऐसे भी हैं जहां अब तक अंधेरा कायम है। यहां बिजली की लाइन न बिछने से लोगों ने बल्ब तक नहीं देखा है। यह हाल तब है जबकि दो दशक में जिले में ग्रामीण विद्युतीकरण पर करीब 250 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं।
र्कई पार्टियों ने सरकारें बनाईं। ग्रामीण विद्युतीकरण काम के नाम पर करोड़ों रुपये भी खर्च किए गए और कई योजनाएं भी बनाईं। इसके बाद भी प्रत्येक गांव तक सरकार बिजली नहीं पहुंचा सकीं। जनप्रतिनिधियों की बेरुखी और अफसरों की उदासीनता से हर घर में उजाला पहुंचाने का सपना अब तक सार्थक नहीं हो सका है। लोग केरोसिन की ढिबरी से अंधेरा दूर कर रहे हैं। वहीं कुछ लोग सरकार के भरोसे रहने के बजाय सौर ऊर्जा का उपयोग कर रहे हैं।
कांग्रेस नेतृत्व में बनी यूपीए सरकार ने राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना बनाकर काम किया तो अब भाजपा सरकार ने दीन दयाल उपाध्याय विद्युतीकरण योजना शुरू की है। इसके बाद भी जिले का प्रत्येक गांव रोशन नहीं हो पाया है। 440 गांव और मजरे अब भी विद्युतीकरण से वंचित हैं। हालांकि जिला विद्युत समिति की बैठक में यह मामला उठा था। समिति के अध्यक्ष केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री संतोष गंगवार ने इन गांवों में विद्युतीकरण कराने पर जोर दिया।
कोट
भुत्ता के सोहलिया मोहलिया और मसूरा मोहनपुर दो गांव ऐसे चिह्नित किए गए हैं जहां अब तक बिजली की लाइन नहीं बिछी है। इन गांवों को चिह्नित किया जा चुका है। जल्द ही विद्युतीकरण भी कराया जाएगा। 438 गांवों के लिए दीन दयाल उपाध्याय विद्युतीकरण योजना के तहत प्लान मांगा गया है।
-तारिक वारसी, एसई ग्रामीण