बानखाना और मझगवां के संक्रमितों के साथ ट्रकों में आए सौ लोगों को भी नहीं खोज पाया स्वास्थ्य विभाग
बरेली। हैदराबाद और अहमदाबाद से वापस आए संक्रमित प्रवासियों के साथ 40 से ज्यादा और लोग बरेली आए थे, जो फिलहाल लापता हैं। बरेली पहुंचने के बाद ये लोग कहां गए, इसका भी पता न लगने से स्वास्थ्य विभाग में खलबली मची हुई है। आशंका जताई जा रही है कि इनमें अगर कुछ और लोग संक्रमित हुए तो सामुदायिक संक्रमण की वजह बन सकते हैं। इससे पहले बानखाना और मझगवां के संक्रमित के साथ आए इससे भी ज्यादा लोगों का पता लगाने में नाकाम रहने के बाद स्वास्थ्य विभाग उनकी तलाश बंद कर चुका है।
संक्रमितों के संपर्क में आए लोगों की तलाश कर रही सर्विलांस टीम के डॉ. अनुराग गौतम और आईडीएसपी डीडीएम संजय कुमार के मुताबिक एजाजनगर गौटिया का संक्रमित युवक हैदराबाद से ट्रक से प्रयागराज पहुंचा था। वहां से रोडवेज बस से लखनऊ आया और लखनऊ से फिर एक ट्रक में सवार होकर बरेली नकटिया आया था। बरेली आने के दौरान ट्रक में 18 लोग साथ नकटिया पर ही उतरे। वहीं, सिरौली के पयास गांव का संक्रमित युवक अहमदाबाद से ट्रेन के जरिए गोरखपुर पहुंचा। वहां से सीधे बरेली रोडवेज बस से आया। बस में करीब 60 लोग सवार थे। इसमें से 22 लोग बरेली में उतरे थे। बरेली आकर वह एक मैजिक के जरिए अपने घर पहुंचा। वहां परिजनों से मिलकर घर पर सामान रखा और 21 को स्क्रीनिंग कराने पहुंचा था। सफर के दौरान संक्रमितों के साथ रहे 40 प्रवासी कहां के रहने वाले हैं। इस बाबत अब तक कोई जानकारी नहीं मिल सकी है।
हॉटस्पॉट एरिया में हुई स्क्रीनिंग, लिए 65 सैंपल
स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी रिपोर्ट के मुताबिक सोमवार को हॉटस्पॉट एरिया सिरौली और मऊचंदपुर में 12 टीमों ने सघन अभियान चलाकर 954 घरों का सर्वे और 5448 लोगों की स्क्रीनिंग की। मगर, कोई संदिग्ध संक्रमित नहीं मिला। तीन सौ बेड अस्पताल में दो टीमों ने 162 संदिग्ध रोगियों की स्क्रीनिंग की और 40 लोगों के सैंपल लिए। दूसरी ओर, एमएमयू की टीम ने भी 25 सैंपल लिए हैं। सैंपल मंगलवार को जांच के लिए आईवीआरआई भेजे जाएंगे।
अपनी स्क्रीनिंग कराएं बरेली आए प्रवासी
जो प्रवासी सीधे अपने घर पहुंच गए हैं। वह परिवार और समाज के हित में नजदीकी सीएचसी पर जाकर स्क्रीनिंग कराएं। लोगों से अपील है कि वह जागरुकता का परिचय देते हुए अपने आसपास पड़ोस में आने वाले प्रवासियों की जानकारी हेल्पलाइ नंबर पर दें। ताकि उनकी स्क्रीनिंग और जरूरत पड़ने पर सैंपलिंग की जा सके। - डॉ. रंजन गौतम, एसीएमओ, जिला सर्विलांस अधिकारी
रसूख हो तो स्वास्थ्य विभाग घंटों में मंगा लेता है रिपोर्ट
बरेली। एक तरफ तो स्वास्थ्य विभाग के अफसर करीब दस दिनों से लगातार आईवीआरआई पर नमूनों की रिपोर्ट देने में लेटलतीफी का आरोप लगा रहे हैं लेकिन दूसरी तरफ ऐसे भी मामले सामने आ रहे हैं जब किसी के रसूख से जुड़े मामले में हाथ के हाथ रिपोर्ट मंगा ली जाती है। दो दिन पहले युवा डॉ. रितेश माहेश्वरी की सैंपल की रिपोर्ट चंद घटों में आने के बाद एक बार फिर यह सवाल उठ रहा है।
जिस तरह सैंपल लेने के बाद उनकी रिपोर्ट कई-कई दिन बाद आ रही है, उससे साफ तौर पर जिले में खतरा बढ़ता दिख रहा है। स्वास्थ्य विभाग आरोप लगाता रहा है कि आईवीआरआई से सैंपलों की रिपोर्ट समय पर नहीं दी जा रही है जबकि आईवीआरआई प्रशासन लगातार इन आरोपों को खारिज करता आ रहा है। आईवीआरआई और स्वास्थ्य विभाग के बीच यह मामला काफी हद तक टकराव की वजह भी बनने लगा है। ऐसे में एक बार फिर स्वास्थ्य विभाग की ओर से घंटों में ही किसी सैंपल की रिपोर्ट आईवीआरआई से मंगा लिए जाने के बाद फिर सवाल उठ रहे हैं। इससे पहले कलक्ट्रेट में हंगामा मचाने वाली हजियापुर के संक्रमित की पत्नी की भी रिपोर्ट महज पांच-छह घंटे में मंगा ली गई थी। रामपुर गार्डन के एक अस्पताल की डॉक्टर के सैंपल की रिपोर्ट भी आठ घंटे के भीतर स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने मंगा ली। इस मामले में स्वास्थ्य विभाग के अफसरों को कॉल की गई लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका।