बरेली। नए कानून लागू होने के बाद उनसे संबंधित किताबों की मांग बढ़ गई है। रोजाना 40 से 50 किताबें बिक रही हैं। एकाएक मांग बढ़ने से प्रकाशक भी समय पर किताबें उपलब्ध नहीं करा पा रहे हैं।
भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारत साक्ष्य अधिनियम के लागू हो जाने के साथ ही बाजार में नए कानून की किताबें भी आ चुकी हैं। अब भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं में मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं। चूंकि, सारी धाराएं बदल गई हैं, लिहाजा पुलिस से लेकर अधिवक्ताओं के सामने इन धाराओं को याद करना चुनौतीपूर्ण है। इसके लिए अधिवक्ताओं से लेकर पुलिस व अभियोजन अधिकारी तक नए कानून की किताबें पढ़ रहे हैं। यही कारण है कि नए कानून की किताबों की मांग बढ़ गई है।
कचहरी में किताबों की दुकान के स्वामी व अधिवक्ता अमित बताते हैं कि नए कानून की किताबें दिसंबर में ही आ गई थीं। लोगों में असमंजस था कि हो सकता है सरकार बदल जाए और नया कानून लागू न हो। यही कारण रहा कि तब ये किताबें ज्यादा नहीं बिकीं। अब एक जुलाई से नया कानून लागू होने के बाद से किताबों की बिक्री काफी बढ़ गई है। कचहरी व आस-पास स्थित दुकानों के अलावा एजेंट भी किताबें बेच रहे हैं। कचहरी में 40 से 50 किताबें रोजाना बिक रही हैं।
भारतीय दंड संहिता की किताब बनी इतिहास
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कानून की किताबें बेचने वालों को नया कानून लागू होने से नुकसान भी हुआ है। दुकानों पर भारतीय दंड संहिता की किताबें भी रखी हैं। चूंकि, पुराना कानून अब खत्म हो चुका है, लिहाजा इस किताब की जरूरत अधिवक्ताओं को नहीं। दुकानदार इसको लेकर परेशान हैं। प्रकाशक पुरानी किताबों को लेने के लिए तैयार नहीं हैं। दुकानदारों का कहना है कि यह नुकसान उन्हें झेलना ही होगा।