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आतंकी ट्रेनिंग के लिए पीओके जाने वाला था इनामुल

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इनामुल हक की फेसबुक आईडी में लगा फोटो। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
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अंसार गजवातुल हिंद के स्लीपिंग मॉड्यूल के तौर पर कर रहा था काम
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आतंकी संगठन की खुराफाती सोच से प्रभावित होकर बदला अपना नाम

बरेली। इनामुल हक से लखनऊ में चल रही एटीएस की पूछताछ में लगातार चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। एटीएस के सूत्र दावा कर रहे हैं कि इनामुल अलकायदा के संगठन अंसार गजवात उल हिंद की खुराफाती सोच से प्रभावित शख्स है और इस जेहादी संगठन के लिए बतौर स्लीपिंग मॉडयूल्स काम कर रहा था। दावा यह भी किया जा रहा है कि जल्द ही वह आतंकी प्रशिक्षण लेने के लिए वह जल्द ही पीओके जाने वाला था।
कटघर में रहने वाले इनामुल हक को रिमांड पर लेकर एटीएस पूरे जेहादी नेटवर्क से जुड़े लोगों की जानकारी जुटाने की कोशिश कर रही है। अब तक की छानबीन में पता चला है कि इनामुल सोशल मीडिया पर बेहद सक्रिय शख्स था और फेसबुक व इंस्ट्राग्राम के जरिये पूरे देश में तमाम लोगों से जुड़ा था। जम्मू-कश्मीर, केरल, कर्नाटक के युवाओं से उसका ज्यादा संवाद होता था। हालांकि मोबाइल से बातचीत का कोई खास रिकार्ड नहीं मिला जिसके बाद अंदाजा लगाया जा रहा है कि उसकी ज्यादातर बातचीत इंटरनेट या व्हाट्सएप कॉलिंग के जरिये होती थी जिसका रिकार्ड मिलना संभव नहीं है।
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इमानुल हक ने अपना नाम अबू मोहम्मद अल हिंदी रख लिया था और वह इसी नाम से फेसबुक पर आईडी बनाकर अपने संदेश लोगों को भेज रहा था। सूत्र बताते हैं कि ऐसा उसने जाकिर मूसा और उसके संगठन गजवात उल हिंद संगठन की विचारधारा से प्रेरित होकर किया था और फेसबुक प्रोफाइल पर अलकायदा का झंडा भी लगा रखा था। सूत्र बताते हैं कि वह जल्दी ही पाक अधिकृत कश्मीर जाने वाला था। वहां उसे 15 दिवसीय प्रशिक्षण दिया जाना था। इसके बाद वह सक्रिय रूप से आतंकवादी मिशन में शामिल हो जाता।

ललहारी के बाद संगठन के खात्मे का दावा

जम्मू-कश्मीर में सुरक्षाबलों से हुई मुठभेड़ में अंसार गजवात उल हिंद का कमांडर अब्दुल हमीद ललहारी उर्फ हारुन अब्बास मारा जा चुका है। इसके बाद जम्मू-कश्मीर पुलिस ने दावा किया था कि इस आतंकी संगठन का उनके प्रदेश से सफाया हो चुका है। इससे पहले संगठन के सदर जाकिर मूसा को मुठभेड़ में मार दिया गया था जिसके बाद ललहारी को चीफ बनाया गया था। इमानुल मूसा का बड़ा फॉलोअर है और उसे शहीद भाई बोलता है। जम्मू कश्मीर पुलिस के दावे से इतर माना जा रहा कि संगठन अभी जीवित है और नए लोग उसकी विचारधारा का प्रसार कर रहे हैं। संगठन को पाकिस्तान से आर्थिक मदद मिलती रही है।

बरेली आ सकती है एटीएस, हो सकती हैं और गिरफ्तारी

लखनऊ एटीएस टीम दस दिनों में साक्ष्य संकलन के लिए बरेली आ सकती है। वहीं इमानुल के मोबाइल से मिले नंबरों व गतिविधियों के आधार पर कुछ और लोगों की गिरफ्तारी की जा सकती है। इमानुल के भाई मुनीर को निर्दोष मानकर एटीएस ने रिश्तेदार को सौंप दिया था। वह शनिवार को भी घर नहीं लौटा। बताया जा रहा है कि मुनीर और पंतनगर में रह रहा इमानुल का परिवार शर्म की वजह से यहां नहीं आ रहे हैं। मुनीर किसी रिश्तेदार के घर ठहरा है।
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