उर्स-ए-रजवी के आखिरी दिन कुल में शिरकत करने के लिए रजा के दीवानों का सैलाब उमड़ पड़ा। लाखों जायरीन मंगलवार को ही शहर में मौजूद थे, बुधवार को कुल की रस्म में शिरकत के लिए आसपास के इलाकों से और अकीदतमंदों की भीड़ उमड़ी तो कुछ घंटों के लिए पूरा शहर थम गया। शहर का कोई हिस्सा ऐसा नहीं बचा जहां जायरीन की भीड़ न हो। उर्स स्थल से दरगाह तक ही नहीं, आसपास के तमाम रास्ते जायरीन से इस कदर खचाखच भरे हुए थे कि कुल की तकरीब में शामिल होने आए लोगों को खड़े होने के लिए जगह ढूंढना तक मुश्किल हो गया।
उर्स के दूसरे दिन मंगलवार रात को शुरू हुआ जलसा भोर में चार बजे तक चला, लेकिन इसके बाद भी जायरीन की मौजूदगी सड़कों पर बनी रही। सुबह में फज्र की नमाज अदा करने के बाद जायरीन दरगाह पर हाजिरी देने के लिए बढ़े। इसी के साथ सड़कों पर जायरीन की भीड़ के सिवा कुछ और नजर आना बंद हो गया। उधर, इस्लामिया कॉलेज ग्राउंड में उर्स स्थल पर भी सुबह फिर तकरीब शुरू हो गई। कुरान ख्वानी और नातोमनकबत के बाद आला हजरत इमाम अहमद रजा खां के उर्स का जलसा शुरू हुआ तो हर शख्स ने अपना रुख उधर की तरफ कर लिया।
जलसे की शुरुआत दरगाह प्रमुख अश्शाह मौलाना सुब्हान रजा खां सुब्हानी मियां की सरपरस्ती और सज्जादानशीन मौलाना अहसन रजा खां कादरी अहसन मियां की सदारत में हुई। इसमें देश-विदेश से आए तमाम उलमा ने दीनदुनिया और सियासी हालात मुस्लिमों की स्थिति तक पर तकरीर की। तकरीर के बाद ठीक 2:38 बजे कुल की रस्म शुरू हुई। जलसे की शुरुआत कारी अब्दुल अकीम ने तिलावत से की तो इसके बाद जो जहां था, उसके कदम वहीं ठहर गए। मीलाद और नातो मनकबत के बाद कुल की रस्म अदा की गई। सज्जादानशीन अहसन मियां ने मुल्कोअवाम की बेहतरी के लिए दुआ की। मंच की व्यवस्था मुफ्ती मोहम्मद सलीम नूरी और कारी यूसुफ रजा ने संभाली। निजामत मौलाना मुख्तार अहमद बहेड़वी ने की।