खलील स्कूल के पूर्व प्रधानाचार्य आसिम पीरजादा ने नौकरी के नाम पर कई लोगोें के लाखों रुपये हड़प लिए और गायब हो गए। सहारनपुर के मंडी थाने की पुलिस आरोपी को धोखाधड़ी करके धन हड़पने के मामले में गैर जमानती वांरट लेकर गिरफ्तार करने के आई, लेकिन यहां उनके बारे में कुछ पता नहीं लग पाया। इसके चलते पुलिस को बैरंग ही लौटना पड़ा।
सहारनपुर के मोहित विहार के रहने वाले रिटायर दरोगा लीलाधर शर्मा ने अपने बेटे नीरज शर्मा को नौकरी दिलाने के नाम पर दस लाख रुपये खलील स्कूल के पूर्व प्रधानाचार्य आसिम पीराजादा को दिए थे। खलील स्कूल की प्रबंध समिति ने आसिम को खुद ही फर्जी प्रमाण पत्र से नौकरी हासिल करने के आरोप में निकाल दिया। नौकरी न मिलने पर लीलाधर ने अपनी रकम मांगी तो आसिम ने उन्हें दो चेक दे दिए। एक चेक छह लाख और दूसरा चार लाख रुपये का था। दोनों चेक खाते में लगाने पर बाउंस हो गए। इस पर लीलाधर ने आसिम के खिलाफ कोर्ट में वाद दायर कर दिया। कोर्ट से गैर जमानती वारंट होने पर आरोपी की गिरफ्तारी के लिए मंडी थाने के दरोगा मोहम्मद वासिक सिद्दीकी और सिपाही उपेंद्र तोमर खलील स्कूल पहुंचे तो वहां से स्टाफ में हड़कंप मच गया। छानबीन के दौरान मालूम हुआ है कि प्रबंधक ने आसिम को तो प्रधानाचार्य के पद से हटा दिया है। उनके स्थान पर फिलहाल नसीर अहमद प्रधानाचार्य का काम देख रहे हैं। स्टाफ के मुताबिक इससे पहले भी कई लोग यह कहते हुए खलील स्कूल आए हैं कि पूर्व प्रधानाचार्य ने उनसे नौकरी के नाम पर रुपये ले रखे हैं। 15 दिन पहले ही एक पार्टी आकर कॉलेज में काफी उनकी तलाश करके चली गई। दरोगा मोहम्मद वासिक ने बताया कि आरोपी की गिरफ्तारी के लिए काफी प्रयास किए गए। लेकिन उनके बारे में पता नहीं लग पाया है। फिर से उनकी तलाश की कोशिश की जाएगी।
लागातार ठगी के शिकार आ रहे हैं
-प्रबंधक चांद हाशमी ने बताया कि आसिम पीरजादा को 20 सितंबर 2014 में हमने कॉलेज से निकाल दिया था। इसके बाद से लगातार स्कूल में बाहर के लोग आ रहे हैं। इन्हें शमीम अहमद ने नौकरी पर रखा था। वह भी अब कमेटी में नहीं है। इसी महीने तीन लोग आए थे। उनका कहना था कि 55 लाख रुपये उनके नियुक्ति के नाम पर आसिम ने लिए हैं।
आसिम की गुमशुदगी लिखा रखी है
दरोगा मोहम्मद वासिक सिद्दीकी ने बताया कि रिटायर दरोगा से दस लाख रुपये लेने से पहले ही आसिम के परिवार वालों ने उसकी थाना मंडी में गुमशुगदी लिखा दी थी। परिवार वालों का कहना है कि उसके बाद से आसिम का पता नहीं लग पा रहा है। जबकि बताया यह जा रहा है कि आसिम यहां शिक्षा अधिकारियों के पास आते-जाते रहते हैं।