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मुंबई में बिचौलिए खा जाते हैं कलाकारों की 75 फीसदी कमाई, फिल्म सिटी बदलेगी किस्मत

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यमुना एक्सप्रेस वे पर फिल्म सिटी के निर्माण के एलान से स्थानीय कलाकार उत्साहित
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बरेली। प्रदेश में यमुना एक्सप्रेस वे पर 1000 एकड़ में फिल्म सिटी के निर्माण की घोषणा से स्थानीय कलाकारों में उत्साह है। कलाकारों का कहना है कि प्रदेश में प्रतिभाओं की कमी नहीं है, लेकिन मुम्बई में पूरा सिंडिकेट बना हुआ है जो बाहर से आई प्रतिभाओं को आसानी से उभरने नहीं देता। किसी को काम मिल भी जाए तो कलाकार की कमाई का 75 फीसदी हिस्सा तो मुम्बई के बिचौलिए ही खा जाते हैं। निर्देशन, अभिनय और फिल्म लेखन से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि फिल्म सिटी का काम अंजाम तक पहुंच गया तो प्रतिभाओं को निखरने का मौका मिलेगा और प्रदेश का नाम भी रोशन होगा।
लघु फिल्म निर्माता एवं निर्देशक गुरदीप सिंह भिंडर का कहना ही कि उत्तर प्रदेश में प्रतिभाओं की तो कमी ही नहीं हैं। कुछ फिल्में तो उत्तर प्रदेश में ही बनीं हैं। बरेली में भी इस क्षेत्र में बहुत काम हो रहा है। प्रदेश में फिल्म सिटी बनती है तो बहुत ही बेहतर रहेगा। उन्होंने कहा कि मुम्बई में तो सिंडीकेट बना हुआ है। यहां के तमाम कलाकार मुम्बई जाकर काम की तलाश में धक्के खाते हैं और वापस आ जाते हैं। उन्हें मौका ही नहीं मिलता। काम मिल भी जाए तो बिचौलिए कमाई का 75 प्रतिशत हिस्सा काम दिलाने की एवज में खा जाते हैं।
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कहानीकार, फिल्म एवं धारावाहिक स्क्रिप्ट राइटर गुडविन मसीह का कहना है कि अगर उत्तर प्रदेश में फिल्म सिटी स्थापित होती है तो यहां के फिल्म निर्माताओं, कलाकारों, पटकथा लेखकों और टेक्नीशियन के अलावा और भी तमाम लोगों के लिए उत्तर प्रदेश सरकार का तोहफा होगा। इससे न सिर्फ प्रतिभाओं को उभरने का मौका मिलेगा, बल्कि लोगों को रोजगार के साधन भी उपलब्ध होंगे।
लेखक निर्देशक एवं थियेटर कलाकार देवेंद्र रावत का कहना है कि अब जो हालात मुम्बई फिल्म इंडस्ट्री के हैं उसे देखते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री का यह अच्छा प्रयास है। यहां के लोग घर में रहकर अपनी प्रतिभा का लाभ उठा सकेंगे। बरेली में ही बहुत प्रतिभा है। मुम्बई इंडस्ट्री में उत्तर प्रदेश और बिहार के लोगों के साथ जो व्यवहार होता है आज किसी से छिपा नहीं है। वहां तमाम बाध्यताओं के कारण उत्तर के लोग टिक नहीं पाते।
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फिल्म अभिनेता एवं रंगकर्मी संजय कुमार का कहना है कि यदि उत्तर प्रदेश में फिल्म निर्माण शुरू हो गया तो यहां के कलाकारों की तो किस्मत खुल जाएगी। यह इंडस्ट्री मील का पत्थर साबित होगी। उत्तर प्रदेश में इसकी लंबे समय से जरूरत है। अभिनेता, लेखक, निर्देशक, संगीतकार जिन्हें मुम्बई में संघर्ष करना पड़ता है और इसमें वह ठगे भी जाते हैं। उत्तर प्रदेश में फिल्म सिटी के लिए नोएडा सबसे बेहतर जगह है। क्योंकि वह एक सेंटर प्लेस है।
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