बरेली। अव्यवस्थित जीवनशैली से करीब 40 फीसदी लोग एसिडिटी से पीड़ित हैं। जानकारी के बाद भी लोग इलाज से परहेज करते हैं, जो बाद में बड़ी बीमारी बनकर सामने आती है। जो जानलेवा साबित हो सकती है।
ये बातें रविवार को प्रेसवार्ता के दौरान फिजिशियन डॉ. सुदीप सरन ने कही। बताया कि बिना डॉक्टर के परामर्श के दर्द की दवा का सेवन एसिडिटी की सबसे बड़ी वजह है। बताया कि अव्यवस्थित खान-पान, बेवजह का तनाव और सोने का समय निर्धारित न होने से सामान्य तौर पर एसिडिटी हो जाती है। सीने में जलन, पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द, जी मिचलाना, उल्टी आना आदि इसके मुख्य लक्षण हैं। कुछ दिनों तक यह समस्या रही तो हाइटस हर्निया हो जाता है। इसमें पेट फेफड़ों के करीब आ जाता है। इसका पता एंडियोस्कोपिक विधि से चलता है। वहीं, पेट मेें कीड़े, आंत में इंफेक्शन समेत अन्य तकलीफ शुरू हो जाती है। उन्होंने एसिडिटी से पीड़ितों को दिनचर्या को ट्रैक पर लाने और खान पान को बेहतर बनाने के साथ ही चिकित्सक का परामर्श जरूरी बताया है। इस दौरान डॉ. रविश अग्रवाल, डॉ. अनूप आर्या, डॉ. जेके भाटिया, डॉ. सुधांशु, डॉ. भसीन, डॉ. विनोद गोयल, डॉ. भारद्वाज आदि मौजूद रहे।