बरेली। अस्पतालों में बायो मेडिकल वेस्ट का निस्तारण सही तरीके नहीं किया जा रहा है। जाने-अनजाने लोग संक्रमण के शिकार हो सकते हैं। लेकिन अब वेस्ट का निस्तारण सही तरीके से नहीं किया गया तो एनजीटी की गाइडलाइन के अनुसार सख्त कार्रवाई का सामना अस्पताल संचालकों को करना होगा। ये जानकारी गुरुवार को आईएमए में बायो मेडिकल वेस्ट के निस्तारण के विषय में आयोजित कार्यशाला में प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग की असिस्टेंट डायरेक्टर डॉ. शिप्रा पांडे ने दी।
उन्होंने कहा कि सूबे के ज्यादातर निजी अस्पतालों में एनजीटी की गाइडलाइन का पालन नहीं हो रहा है। कहा, लाइसेंस देते समय या नवीनीकरण के दौरान संबंधित अस्पताल में बायो मेडिकल वेस्ट के निस्तारण की व्यवस्था जांचने का सुझाव दिया। बताया कि नई गाइडलाइन में एनजीटी ने भारी जुर्माने का प्रावधान रखा है। जो कैटेगरी वाइज लाखों रुपए तक का भी हो सकता है। उन्होंने बायो मेडिकल वेस्ट के प्रकार और उनके निस्तारण की जानकारी दी। बायो मेडिकल वेस्ट को एक साथ रखने के बजाय अलग रंग के डिब्बे में रखने का सुझाव दिया। कहा, नई गाइडलाइन में स्वास्थ्य विभाग और प्रदूषण विभाग को निजी अस्पतालों की जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। अगर, जहां बायो मेडिकल वेस्ट का निस्तारण सही तरीके से नहीं मिलेगा तो कार्रवाई होगी। पंजीकरण भी निरस्त हो सकता है।