बरेली। यदि आपके बच्चे को सांस लेने में तकलीफ है, त्वचा और नाखून पर नीले निशान उभर रहे हैं, दिल धड़कने पर अजीब आवाज सुनाई देती है तो सतर्क हो जाएं। बच्चे के दिल में छेद यानी कंजेनिटल हार्ट डिफेक्ट (सीएचडी) भी हो सकता है। ऐसी स्थिति में घबराएं नहीं बल्कि जांच कराएं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से इस बीमारी से पीड़ित पांच साल उम्र तक के बच्चों के निशुल्क इलाज की व्यवस्था है।
जिला अस्पताल के वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ.करमेंद्र के मुताबिक यह एक जन्मजात विकृति है, जो हृदय की संरचना और कार्यप्रणाली को प्रभावित करती है। पीड़ित बच्चों को कई दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि इस बीमारी की वजह अभी स्पष्ट नहीं है। शोध के अनुसार कुछ बच्चों में इस दोष का कारण जींस या क्रोमोसोम में बदलाव है। वहीं गर्भावस्था के दौरान गर्भवती का खानपान ठीक न होने, दवाओं के सेवन, डायबिटीज से पीड़ित होने व धूम्रपान करने से भी उसके बच्चे में ये बीमारी हो सकती है। अगर समय से इस बीमारी की जानकारी मिले तो इसका इलाज सर्जरी से संभव है।
आरबीएसके टीम करती है सर्वे
ऐसे बच्चे जिनके दिल में छेद होता है, उनका इलाज स्वास्थ्य विभाग निशुल्क कराता है। राष्ट्रीय बाल सुरक्षा कार्यक्रम के तहत स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्रों पर टीमें संपर्क करती हैं। दिल में छेद की पुष्टि होने पर निशुल्क सर्जरी होती है। बीते वर्षों में दिल में छेद मिलने वाले कई बच्चों का टीम ने निशुल्क इलाज कराया है। निजी अस्पताल में इसका खर्च करीब पांच लाख रुपये है।
इन दोषों का होता है निशुल्क इलाज
आरबीएसके के तहत सीएचडी के अलावा कान के पर्दे का ऑपरेशन, रीढ़ की हड्डी में होने वाले फोड़े का इलाज, आर्टिफिशियल अंगों का प्रत्यारोपण, आंख की सर्जरी, फिस्चुला इन एनस, रिस्क डाईफोर्मिटी, हाइड्रो सिफलिस, मूक-बघिर, हाइड्रोसील, टेढ़े-मेढ़े अंगों का इलाज, टंग टाई, क्लब फुट आदि का निशुल्क इलाज होता है। इन बीमारियों का इलाज निजी अस्पतालों में 30 हजार से करीब तीन लाख रुपये तक में होता है।