बरेली। गन्ने का रेट घोषित किए बिना पौने दो महीने से चीनी मिलों को गन्ने की आपूर्ति कराई जा रही है। अब तक उत्पादन का 33 फीसदी गन्ना चीनी मिलों को सप्लाई किया जा चुका है। इतना ही नहीं अफसरों की मिलीभगत से अर्ली वैरायटी के गन्ने को सामान्य वैरायटी के गन्ने में खरीद के लिए पर्चियां थमा दी गईं है। जिसके कारण किसान को 10 से 15 रुपये क्विंटल की दर से कम भुगतान होगा।
जिले की सभी छह गन्ना समितियों ने इस बार पर्चियां सीधे चीनी मिलों को सौंप दी हैं। अपने यहां से ही मिले किसानों को पर्चियां देंगी और उसके आधार पर गन्ना लेंगी। यह सब बिचौलियों को रोकने के उद्देश्य से किया जा रहा है। पिछले सत्र में बिचौलियों के माध्यम से गन्ने की आपूर्ति के आरोप-प्रत्यारोप लगे थे। उन्हीं पर अंकुश लगाने के लिए इस बार चीनी मिलों से सीधे पर्चियों के वितरण की व्यवस्था कराई गई है। इसके अलावा पर्चियों पर यूनीक कोड भी अंकित किया गया, जिससे काफी हद तक बिचौलियों पर अकुंश लगने की बात कही गई है।
साबरखेड़ा के लेखराज गंगवार का कहना है कि उनकी पत्नी लक्ष्मीदेवी के नाम से गन्ने की पर्चियां ली हैं। जिनमें अर्ली वैरायटी के गन्ने के स्थान पर सामान्य प्रजाति का गन्ना अंकित किया है। ऐसी स्थिति एक नहीं अधिकांश किसानों के साथ की गई है। जिसकी शिकायतें की र्गईं लेकिन सुनवाई नहीं हुई है। इतना ही नहीं 2011-12 में ओसवाल चीनी मिल को गन्ना दिया था लेकिन उस समय के 65000 रुपये का भुगतान अभी तक नहीं हुआ है।