बरेली। लॉकडाउन में राशन और आवश्यक वस्तुओं को छोड़कर सभी बाजार बेहाल हैं। गारमेट, साड़ी, हौजरी, इलेक्टानिक्स, कंप्यूटर, बिजली उपकरण और अन्य बाजारों बड़ा झटका लगा है। इससे उबरने के लिए कारोबारी झटपटा रहे है। स्थिति यह है कि करोड़ों रुपये की देनदारी से दबे कारोबारियों की आंखों से आंसू तक नहीं निकल पा रहे हैं। उनका कहना है कि बाजार नहीं खुलने से दुकान और दुकानों में रखा माल खराब होने लगा है। अप्रैल से जून तक तीन माह ही सीजन होता है। अभी तक बाजार खुलने की कोई उम्मीद नहीं दिख रही है। प्रशासन से कोई सहयोग नहीं कर रहा है जबकि अन्य कई शहरों में कारोबार हो रहा है। सीजनल, सहालग और त्योहारी कारोबार पिट गया है। स्टाक में रखा करोड़ों का माल जून बाद खपाया नहीं जा सकता है। जून में ही अगले सीजन का कारोबार शुरू हो जाता है। बातचीत में कारोबारी बोले- करीब चार-पांच सेक्टरों में ही करीब साढ़े नौ सौ करोड़ रुपये का व्यापार प्रभावित हो गया है। उनसे बातचीत के कुछ अंश प्रस्तुत हैं।
हम शब्दों में कोई प्रतिक्रिया नही कर पाएंगे। आंखों में रोने के लिए आंसू भी नही हैं। क्योंकि सपने में भी नहीं सोचा था कि यह दिन देखने पड़ेंगे। बैंक और अन्य बड़ी देनदारियों के बीच कारोबार 45 दिनों से बंद है। एक पैसे का कारोबार नहीं हुआ है जैसे तैसे कर्मचारियों का वेतन बांटा है आगे हिम्म्मत नहीं है। प्रशासन हस्तक्षेप कर और गारमेंट, कपड़ा सेक्टर शुरू कराए।
- नरेंद्र गुप्ता पप्पू, गारमेंट कारोबारी
गारमेंट, साड़ी और सरार्फा आदि कई बाजार सहालगों में चमकते है कुछ बाजार पूरे वर्ष चमकते हैं। लॉकडाउन में चार-पांच सेक्टरों में करीब पांच सौ करोड़ रुपये का झटका लगा है। इसकी भरपाई करना आसान नहीं इसलिए तुरंत बाजार खुलवाएं जाएं। ईद पर बड़ी खरीदारी होती है और व्यापारियों ने करोड़ों रुपये का माल होली से पहले मंगा लिया , स्टाक भरा हुआ। प्रशासन इन सेक्टरों को खोलने की अनुमति दे।
- देवेंद्र गाबा, शोरूम व्यापारी
सभी कार्यालय खुल रहे हैं। बच्चों की आनलाइन पढ़ाई भी शुरू हो गई है। तमाम लोगों को कंप्यूटर और उपकरण चाहिए लेकिन बाजार खुलने की अनुमति नहीं दी जा रही है। हर दिन सैकड़ों फोन आ रहे हैं कि प्रिंटर, इंक, हार्डडिस्क आदि की मांग हो रही है।आईटी क्षेत्र के लिए यह बाजार खुलना चाहिए। मोबाइल फोन सेक्टर को भी छूट मिलना चाहिए।
विपुल गर्ग, कंप्यूटर कारोबारी
सहालग और त्योहारों पर बड़े स्तर पर लोग इलेक्क्ट्रानिक्स सामान और घरेलू उपकरण खरीदते हैं। टीवी, फ्रीज, कूलर बाजार 15 जून तक ही चलता है। एक माह बचा है अभी तक इस बाजार को खोलने की कोई योजना नहीं बनी है। करोडों रुपये का माल भरा हुआ है, इसकी वापसी भी होना मुश्किल है। कंपनियां गारंटी देने से इंकार कर सकती हैं। ऐसे में दोहरी मार पड़ रही है।
- हरीश अरोरा, अध्यक्ष इलेक्टानिक्स डीलर एसोसिएशन
हर सीजन में 60-70 कारोड़ रपये का कारोबार एसी आदि बाजार में होता है। स्थिति यह है कि अभी तक एक भी एसी नहीं बिका है। मैकेनिकों को भी छूट नहीं दी जा रही है। प्रशासन से मुलाकात कर समस्या से अवगत कराया तो कह दिया कि सिर्फ सरकारी कार्यालयों में ही मेंटीनेंस कार्य हो सकते हैं। एसी बाजार नहीं खुलने से करीब 50 से ज्यादा कारोबारी परेशान हैं।
- संदीप खंडेलवाल, एसी थोक बिक्रेता
सरकार ने शराब दुकानें खुलवा दी हैं तो गारमेंट, साड़ी और हौजरी बाजार भी खोल देना चाहिए। क्योंकि इसका स्टाक और कारोबार सीजनल होता है। करोड़ों का कारोबार लॉकडाउन में बर्बाद हो गया है। स्टाक भी रखा सामान इस सीजन खपाना मुश्किल होगा। प्रशासन और सरकार मदद करे।
राकेश सेठी, हौजरी व्यवसायी