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Bareilly News: विशेषज्ञ चिकित्सक मिलें तो दूर हो जिला अस्पताल का दर्द

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बरेली। मुख्यमंत्री ने तीन सौ बेड अस्पताल का विस्तार कर सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल बनाने का प्रस्ताव मांगा है। दूसरी ओर, मंडलीय जिला चिकित्सालय विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी से जूझ रहा है। अगर इनकी तैनाती हो जाए और मिनी आईसीयू भी बन जाए तो मरीजों को हायर सेंटर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
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तीन सौ बेड अस्पताल में आंशिक ओपीडी संचालित होने से मरीजों को मामूली राहत मिली, लेकिन दर्द कई गुना बढ़ गया। मरीज जांच और इलाज के लिए चक्कर काट रहे हैं। विभागीय रिकॉर्ड के अनुसार जिला अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों के 35 पद स्वीकृत हैं, पर तैनाती महज 19 की है। कार्डियोलॉजिस्ट, नेफ्रोलॉजिस्ट, डेंटिस्ट, डर्मेटोलॉजिस्ट के पद रिक्त हैं। फिजिशियन, सर्जन, आर्थो व नेत्र रोग आदि के भी चिकित्सक पूरे नहीं हैं। ओपीडी निजी मेडिकल कॉलेज के प्रशिक्षु जूनियर डॉक्टरों के सहयोग से चल रही है।

आईसीयू न होने से गंभीर मरीजों को हायर सेंटर रेफर किया जाता है। इमरजेंसी में भर्ती होने वाले दुर्घटनाग्रस्त मरीज को जांच के लिए तीन सौ बेड अस्पताल स्थित सीटी स्कैन यूनिट पर भेजा जाता है। वहीं, तीन सौ बेड अस्पताल की पैथोलॉजी में रिजेंट की कमी से कई मरीज जांच के लिए जिला अस्पताल भेजे जाते हैं।यह भागदौड़ मरीजों पर भारी पड़ती है।
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सवालों के घेरे में उपमुख्यमंत्री का आश्वासन

कोरोना महामारी के दौरान वर्ष 2020 में तीन सौ बेड अस्पताल का संचालन शुरू हुआ। दो साल बाद महामारी थमने पर खाली पड़े अस्पताल में उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने ओपीडी संचालन का निर्देश दिया। आश्वासन दिया था कि चिकित्सक, स्टाफ भर्ती होंगे। हालांकि, डेढ़ वर्ष बाद भी तैनाती का कोई पत्र जारी नहीं हुआ। जिला अस्पताल के दंत रोग, चर्म रोग, नेत्र रोग विशेषज्ञ, फिजिशियन, फार्मासिस्ट यहां सेवाएं दे रहे हैं।



धूल फांक रहे दो वेंटिलेटर

विधायक निधि से मिले दो वेंटिलेटर जिला अस्पताल में धूल फांंक रहे थे। कोरोना महामारी के दौरान उन्हें तीन सौ बेड अस्पताल भेज दिया गया, पर विशेष चिकित्सक के अभाव में वे यहां भी धूल फांक रहे हैं। यह हाल तब है, जबकि कोरोना महामारी के दौरान वेंटिलेटर संचालन के लिए स्वास्थ्य विभाग ने एक टेक्नीशियन संविदा पर रखने का निर्णय लिया था।



तीन सौ बेड अस्पताल में हैं ये सुविधाएं

तीन सौ बेड अस्पताल में के आईसीयू में पीएम केयर फंड से मिले 33 वेंटिलेटर बेड, जिला अस्पताल से मिले दो वेंटिलेटर बेड, 13 एचएफएनसी, ऑक्सीजन प्लांट, जनरेटर, पानी की टंकी, किड्स वार्ड, डिलीवरी ओटी आदि सुविधाएं हैं। मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल की तर्ज पर इसके संचालन के लिए मंडलायुक्त, जिलाधिकारी, सीएमओ प्रयासरत हैं, लेकिन अब तक कोई नतीजा नहीं निकल सका है।



जिला अस्पताल एक नजर में

प्रतिदिन 1100 से 1300 मरीजों की ओपीडी, 80 से 100 इमरजेंसी।

प्रतिदिन 250 से 300 सैंपलिंग और जांच।

वार्ड में कुल 325 बेड, 86 ऑक्सीजनयुक्त बेड, 25 एनएचएम के अधीन।

चार बेड की ओटी, मेल, फीमेल, ओल्ड एज, पेइंग, बच्चा वार्ड, एनआरसी और ब्लड बैंक।

एक हजार लीटर क्षमता का ऑक्सीजन प्लांट, मैनीफोल्ड, डायग्नोसिस, फिजियोथेरेपी यूनिट।





रिक्त पदों पर तैनाती के लिए शासन से मांगी गई जानकारी भेजी जा रही है। पर अब तक सकारात्मक जवाब नहीं मिला है। अगर स्वीकृत पदों के सापेक्ष विशेषज्ञ चिकित्सक मिल जाएं तो मरीजों को काफी राहत मिलेगी। मिनी आईसीयू बनाने का प्रयास हो रहा है। तीन सौ बेड अस्पताल से वेंटीलेटर मंगाए हैं। - डॉ अलका शर्मा, एडीएसआईसी, जिला अस्पताल
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ब्यूरो
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