बरेली। सड़क निर्माण की अड़चन 10 दिन में दूर नहीं हुई तो परसाखेड़ा गौटिया के ग्रामीण 26 दिसंबर को फिर नगर निगम में डेरा डालेंगे। अबकी बार पहले से ज्यादा लोग आएंगे। बुजुर्ग और बच्चे भी शामिल होंगे। धरना-प्रदर्शन में भाग लेने वाले ग्रामीणों ने ये बातें कहीं।
पूर्व पार्षद सुखदीश कश्यप ने बताया कि मासूम की मौत से दुखी ग्रामीण रविवार दोपहर गांव के मंदिर परिसर में एकत्र हुए, लेकिन कोई भी अफसर या जनप्रतिनिधि उनको सांत्वना देने नहीं पहुंचे। ग्रामीण इस बात से आहत हैं। वे शासनादेश की अड़चन दूर होने तक आंदोलन जारी रखने की बात कह रहे हैं। आपसी विचार-विमर्श के बाद 26 दिसंबर से दोबारा धरना-प्रदर्शन करने का निर्णय लिया गया है।
महिलाएं बोलीं- सुनवाई होती तो नहीं जाती मासूम की जान
मासूम विद्या की मौत से दुखी पुष्पा को सांत्वना देने के लिए गांव की महिलाओं का दिनभर तांता लगा रहा। पुष्पा कुछ बोल नहीं पा रही थीं। मीडियाकर्मी गांव में पहुंचे तो महिलाएं बोलीं- अगर उनकी सुनवाई हो गई होती तो मासूम की जान नहीं जाती। पुष्पा कच्चे घर में रहती हैं। महिलाओं ने उसके परिवार के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत अनुदान दिए जाने की मांग उठाई है। पुष्पा की जेठानी ने कहा कि अगर अब तक अफसर चेत गए होते भतीजी बच जाती।
अब युवा दे रहे ''सड़क नहीं तो वोट नहीं'' का नारा
परसाखेड़ा गौटिया के कई युवाओं ने कहा कि ''''सड़क नहीं तो वोट नहीं'''' के नारे के साथ आंदोलन को आगे बढ़ाएंगे। युवा परविंदर कश्यप का कहना है कि 25 वर्ष से गांव में आने-जाने के लिए रास्ता नहीं है। अब हम आंदोलन के जरिये रास्ते की मांग करेंगे। सुनील कश्यप ने कहा कि अगर अधिकारियों और नेताओं ने नहीं सुना तो हम 2024 के चुनाव में मतदान नहीं करेंगे।
बाधा दूर न हुई तो मिलकर उठाएंगे आवाज
उम्मीद है कि अधिकारी सड़क निर्माण की बाधा दूर करेंगे। ऐसा नहीं हुआ तो मिलकर आवाज उठाएंगे। -ओमप्रकाश, परसाखेड़ा गौटिया
अबकी बार आंदोलन और तेज होगा। पशुओं और ट्रैक्टर-ट्राॅली के साथ पूरे परिवार को लेकर पहुंचेंगे। - रमेश कश्यप, परसाखेड़ा गौटिया
बीमार होने पर बढ़ जाती है मुश्किल, डेढ़ किमी पैदल चलते हैं लोग
परसाखेड़ा गौटिया से झुमका तिराहे तक डेड़ किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। अगर कोई बीमार हो जाए तो मुश्किलें और बढ़ जाती हैं। ग्रामीणों ने बताया कि अंडरपास और सड़क बन जाती तो उनको रेल पटरी नहीं पार करनी पड़ती। ई-रिक्शा और ऑटो की सेवा आसानी से उपलब्ध हो सकती थी, लेकिन अभी तो हाईवे जक पहुंचने के लिए काफी जद्दोजहद करनी पड़ती है।