If Muslim votes did not break, then God could win
- फोटो : बरेली, अमर उजाला
चुनाव से कुछ दिनों पहले तक सपाई रहीं शहला ताहिर ने भगवत सरन गंगवार को चुनौती देकर सपा का खेल बिगाड़ दिया। केसर सिंह तो भगवा लहर पर सवार हो ही चुके थे । भगवत के वोटों को बांटकर एक तरह से शहला ताहिर ने कमल खिलाने में मदद कर दी।
यह तो तय था कि नवाबगंज से जीतेगा कोई गंगवार ही। यह भी तय था कि अगर शहला ताहिर ने ज्यादा वोट हासिल किए तो नुकसान भगवत सरन गंगवार का होगा। दरअसल शहला ताहिर चुनाव से पहले सपा में थीं और वहां की चेयरमैन हैं। शिवपाल की सूची में वह सपा की प्रत्याशी भी बनाई गई थीं। ऐन वक्त पर जब सपा में विवाद हुआ तो अखिलेश की सूची से वह आउट कर दी गईं और भगवत सरन गंगवार को यहां से टिकट दे दिया गया। बस यहीं से शहला ने भगवत को हराने की ठान ली और आईएमसी में शामिल होकर टिकट ले आईं। शुरू में तो यही माना गया कि मुस्लिम वोट भाजपा को हराने के लिए सपा का साथ देंगे लेकिन ऐसा हुआ नहीं और यहां मुस्लिम वोटों का बंटवारा बुरी तरह हुआ। केसर सिंह गंगवार को इसका लाभ हुआ। हिंदू वोटों को बसपा प्रत्याशी वीरेंद्र सिंह गंगवार भी ज्यादा नहीं बांट पाए। यहां केसर सिंह को जहां 93711 वोट मिले वहीं भगवत सरन गंगवार को 54569 वोट हासिल हुए। शहला ताहिर 36761 वोट मिले और वीरेंद्र सिंह गंगवार को 18948 वोट ही मिले।