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Bareilly News: हादसों में जान बची तो इलाज में उड़ रही परिवार की कमाई

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बरेली। हेलमेट और सीट बेल्ट का इस्तेमाल किए बिना सड़कों पर फर्राटा भर रहे लोग जब हादसों का शिकार होते हैं तो उनकी जान पर बन आती है। शासन के तमाम सर्वे और जांच रिपोर्ट में इस तरह की स्थिति आती रहती है और लोगों को जागरूक करने के लिए व्यापक अभियान चलाए जाते हैं। इन दिनों यातायात माह में पुलिस व परिवहन विभाग के जिम्मेदार ऐसा ही प्रयास कर रहे हैं। इस दौरान अमर उजाला टीम ने सड़क हादसों का शिकार हुए लोगों से बात की। उन्होंने बताया कि जो कमाई दूसरे कामों पर खर्च होनी थी, वह उनके इलाज में लग रही है। हमसे गलती हुई, लेकिन आप मत करना। ब्यूरो
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सिर की चोट ने दिया जीवन भर का दर्द, दो ऑपरेशन कराए
आंवला। मोहल्ला घंटाघर चौक निवासी 22 वर्षीय अंश मौर्य ने बताया कि 27 नवंबर 2023 की शाम बाइक से मनौना में बाबा श्याम के दर्शन करने जा रहे थे। कस्तूरबा स्कूल के पास सड़क की एक साइड में टैंकर खड़ा था। अंधेरे में खड़े टैंकर पर रिफ्लेक्टर नहीं था और उनके पास हेलमेट नहीं था। बाइक टैंकर के पिछले हिस्से से टकराई तो सिर पर गहरी चोट लगी। पीछे बैठे साथी ने सूचना दी तो परिजनों ने निजी अस्पताल में भर्ती कराया। फिर बरेली रेफर किया गया। दो बार सिर का ऑपरेशन हुआ। परिवार के सामने बड़ा आर्थिक संकट खड़ा हुआ। सभी सदस्यों खासकर दो चाचा-चाची व साथियों ने भरपूर सहयोग किया। इस समय भी वह डॉक्टर के परामर्श में हैं। संवाद

मौत छूकर निकल गई, आप ध्यान रखना

नवाबगंज। गांव जयनगर निवासी आकाश गंगवार ने बताया कि पांच अक्तूबर को भाभी रजनी गंगवार, भतीजे अक्षत के साथ पीलीभीत से दवा लेकर बाइक से घर लौट रहे थे। बरेली-पीलीभीत हाईवे स्थित इनायतपुर गांव के सामने पहुंचे तो सामने से आ रही कार ने जोरदार टक्कर मार दी। भाभी और भतीजा गंभीर घायल हो गए। पुलिस ने उन्हें अस्पताल पहुंचाया। एक बार लगा कि मौत छूकर निकल गई है। एक सप्ताह अस्पताल में रहने के बाद घर लौटे। परिजनों और रिश्तेदारों से उधार तक लेना पड़ गया। संवाद
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एक साल से कोमा में है बेटी, परिवार हुआ कर्जदार
बहेड़ी। केसर चीनी मिल के कर्मचारी श्रीकांत सिंह ने बताया कि उनकी 20 वर्षीय बेटी दिव्या सात दिसंबर 2024 को स्कूटी से बरेली जा रही थी। रोडवेज बस की टक्कर से वह गंभीर घायल हो गई थी। दिव्या तब से आज तक कोमा में है। उसका दिल्ली तक इलाज कराया। सारी कमाई बेटी के इलाज में खर्च हो रही है। एक वक्त की रोटी खा रहे हैं। परिवार की तरक्की रुक गई है और थक हारकर बेटी को घर लेकर आ गए हैं। उन्होंने बस नंबर के आधार पर रिपोर्ट करा दी, लेकिन परिवहन विभाग की ओर से भी इलाज के लिए कोई मदद नहीं मिली।
भतीजे की त्योहार के दिन गई थी जान, हम नहीं मनाते होली
रिठौरा। कस्बा के मोहल्ला काहरान निवासी लेखराज कश्यप ने बताया कि उनका सगा भतीजा 19 साल का पिंटू कश्यप होली के दिन रंग खेलने के बाद बाइक से पनीर लेने निकला था। कुछ देर बाद खबर आई कि किसी दूसरी बाइक से भतीजे की बाइक टकरा गई है। चूंकि, वह हेलमेट नहीं पहने था तो सिर पर चोट से खून की धार बह निकली। अस्पताल में पिंटू की उपचार के दौरान मौत हो गई। पिंटू के पिता की मौत पहले ही हो चुकी थी। घर में मां वीरावती का वही सहारा था। हेलमेट होता तो शायद पिंटू की जान बच जाती।
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