पैरवी न करने के लिए दिए गए थे प्रलोभन
कोर्ट से लेकर पुलिस अफसरों की चौखट तक भटकते विजेंद्र गुप्ता के सिर पर बेटे के हत्यारोपियों को सजा दिलाने की धुन सवार थी। इससे कम उन्हें कुछ भी स्वीकार नहीं था। उन्होंने पत्रकारों से कई बार कहा था कि केस में पैरवी न करने को लेकर उनको प्रलोभन दिए जा रहे हैं। रकम की राशि लाखों से उठकर करोड़ तक पहुंच गई, पर बुजुर्ग दंपती टस से मस न हुए। अंतत: दंपती की हत्या से पैरवी की आखिरी कड़ी टूट गई और अब मुकुल के एनकाउंटर का राजफाश भी हमेशा के लिए सवालों में घिरकर रह गया है।