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भूख से बिलखते बच्चों को दूध नहीं मिला तो पानी और टॉफी खिलाकर कराया शांत

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अपने सफर के बारे में बताती रुबी। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
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नवाबगंज आश्रय घर से 262 प्रवासी मजदूर भेजे गए घर
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हिमाचल से सहारनपुर तक पथरीले रास्ते पर पुलिस के डंडे और नदी का पानी पीकर आए प्रवासी

नवाबगंज। प्रवासी मजदूरों को सुविधा उपलब्ध कराने का दम भरने वाले प्रशासन के कागजों में भले ही सबकुछ ठीक चल रहा हो, लेकिन धरातल पर स्थिति अलग है। प्रवासी मजदूरों को भोजन तो मिल जा रहा है, लेकिन दूध के बिना उनके बच्चे भूख से बिलख रहे हैं। पानी और टॉफी खिलाकर मजदूरों को बच्चों की भूख शांत करनी पड़ रही है। इन मजदूरों ने तमाम कष्ट सहकर जब अपनी जन्मभूमि पर कदम रखा तो उनकी आंखें भर आईं।
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बरेली-पीलीभीत हाईवे पर स्थित शेल्टर होम में सोमवार को 262 प्रवासी मजदूर पहुंचे। अमर उजाला में प्रवासी मजदूरों की खबर प्रमुखता से प्रकाशित होने के बाद सोमवार को प्रशासन अलर्ट हो गया। सुबह से ही मजदूरों को भोजन, पानी और राशन की किट का वितरण शुरू कर दिया गया। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने उनका परीक्षण किया। शाम चार बजे के बाद मजदूरों को बसों से उनके घरों को भेजने का सिलसिला शुरू किया गया।

यमुनानगर में पुलिस ने की बर्बरता

आंवला के सूरज पाल अपनी पत्नी अनारकली और चार छोटे बच्चों के साथ हिमाचल से सहारनपुर तक पथरीले रास्ते से पैदल चलकर आए। रास्ते में लोगों ने भोजन देकर मदद की, लेकिन यमुनानगर पुलिस ने पैदल आते देख जमकर डंडे बरसाए और बच्चों के साथ पीछे भगा दिया। बाद में वहीं के एक ग्रामीण ने नदी पार कराकर जंगल के रास्ते उन्हें आगे निकाल दिया। रास्ते में बच्चों को देखकर हिम्मत जवाब दे गई। पत्नी ने सहारा दिया और यहां तक पहुंच गए। अब दोबारा हिमाचल की तरफ मुंह करके नहीं देखेंगे।

बच्चों की भूख ने जीते जी मार डाला

रिछोला किफायतुल्ला गांव की रूबी ने बताया कि हमें तो खाना मिल जाता था, लेकिन बच्चों को दूध नहीं मिल पाता था। दूध के बिना बच्चों को बिलखता देख खुद के भी मुंह में निवाला नहीं चलता था। पानी और टॉफी खिलाकर बच्चों को लेकर यहां तक पहुंचे। घर पहुंच जाएं, हरियाणा को अलविदा कह आए हैं।
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