एंटीबॉडी से पता लगेगा कि बरेली में कोरोना का सामुदायिक फैलाव हुआ या नहीं
बरेली। कोरोना संक्रमण के सामुदायिक फैलाव का पता लगाने दिल्ली से बरेली आई आईसीएमआर की टीम ने रविवार को दस क्लस्टर इलाकों में 40-40 लोगों के ब्लड सैंपल लिए। इन ब्लड सैंपल से सीरम अलग कर उसकी जांच दिल्ली की आईसीएमआर की लैब में होगी। लैब की रिपोर्ट बताएगी कि जिले में कोविड-19 का सामुदायिक फैलाव हुआ है या नहीं।
जिला सर्विलांस अधिकारी एसीएमओ डॉ. रंजन गौतम ने बताया कि शनिवार देर रात आईसीएमआर की 26 सदस्यीय टीम बरेली पहुंची थी। रविवार को टीम ने स्वास्थ्य विभाग के एलटी, एएनएम, आशा वर्करों के साथ हॉटस्पॉट रहे सुभाषनगर के साथ गंगापुर और बानखाना, बहेड़ी के खिराना गांव, मीरगंज के शीशगढ़, बलेही, आंवला के अबादनपुर, नवाबगंज में रिछौला चौधरी, फरीदपुर में रसूला वाहनपुर में 40-40 लोगों के ब्लड सैंपल लिए। फतेहगंज पूर्वी में टीम 27 सैंपल ही ले पाई लिहाजा सोमवार को यहां 13 और ब्लड सैंपल लिए जाएंगे।
एसीएमओ ने बताया कि आईसीएमआार की ओर से सीरो सर्विलांस सर्वे प्रभारी और कोविड-19 की स्पेशल ड्यूटी पर तैनात मेडिकल ऑफिसर डॉ. रवींद्र नाथ के नेतृत्व में सैंपल लिए गए हैं। सीरो सर्विलांस के तहत लिए गए ब्लड सैंपल के सीरम को अलग कर लैबोरेटरी में जांच की जाएगी। उसके बाद आगे की जांच आईसीएमआर की लैब में होगी और एंटीबॉडी का पता लगाया जाएगा। नतीजा यह बताएगा कि एक समय पर एक निश्चित जनसंख्या के बीच कोरोना संक्रमण का फैलाव हुआ या नहीं, हुआ तो उसकी प्रकृति और विस्तार क्या था। इसी आधार पर टीम अपनी रिपोर्ट देगी।
एंटीबॉडी मिलने का मतलब सामुदायिक संक्रमण के दौर से गुजर रहा है बरेली
बरेली। आईसीएमआर की टीम ने सुभाषनगर के अलावा जिन इलाकों में लोगों का ब्लड सैंपल लिया, वहां अब तक कोरोना संक्रमण का कोई केस नहीं मिला है। शहर के वरिष्ठ डॉक्टरों का कहना है कि जिन इलाकों में केस न मिलने के बावजूद लोगों में एंटीबॉडी बनती पाई गई तो इसका सीधा मतलब यही होगा कि बरेली कोविड-19 वायरस के सामुदायिक फैलाव के दौर से गुजर रहा है।
वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. सुदीप सरन के मुताबिक आईसीएमआर की टीम ब्लड सैंपल से कोरोना संक्रमण के बारे में तमाम बिंदुओं पर पड़ताल कर सकती है। इसमें कोरोना संक्रमण का फैलाव, ब्लड सैंपल में वायरल लोड और संक्रमण की प्रतिशतता के साथ यह भी पता लगाया जा सकेगा कि बरेली के लोगों में हर्ड इम्यूनिटी बन रही है या नहीं। उन्होंने बताया कि अगर कोरोना संक्रमण का फैलाव मिला तो इसका सीधा अर्थ यह होगा कि लोग कहीं न कहीं प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से किसी संक्रमित के संपर्क में आए हैं। मामूली वायरल लोड यानी संक्रमण का स्तर कम होने से उनमें लक्षण तो नहीं दिखे मगर एंटीबॉडी बन गई। डॉ. सरन के मुताबिक ऐसा होना लोगों में हर्ड इम्यूनिटी बनने का साफ संकेत होगा। हर्ड इम्यूनिटी तभी बनती है जब किसी इलाके में करीब 60 फीसद लोग वायरस की चपेट में आ चुके होते हैं। हर्ड इम्यूनिटी न बनने का मतलब होगा कि खतरा अभी टला नहीं है।
आईएमए के पूर्व अध्यक्ष और वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. रवीश अग्रवाल कहते हैं कि आईसीएमआर की टीम बरेली के लोगों के ब्लड सैंपल में आईजीएन और आईजीजी एंटीबॉडी की जांच करेगी। आईजीएन मौजूदा और आईजीजी पहले बन चुकी एंटीबॉडी की जानकारी देगी। इससे पता चलेगा कि कितने प्रतिशत लोगों में कितनी तादाद में एंटीबॉडी बन रही है। अगर, एंटीबॉडी नहीं है तो सीधा अर्थ है कि कोरोना संक्रमण का फैलाव होना बाकी है। जब तक वायरस का सामुदायिक फैलाव नहीं होगा, तब तक हर्ड इम्यूनिटी नहीं बनेगी और कोरोना का खतरा बरकरार रहेगा।