विकसित की गई मुर्गिंयों और बटेर की नई प्रजातियों के बारे में भी पूछा
बरेली। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) की गवर्निंग बॉडी के सदस्य अखिलेश कुमार ने शुक्रवार को यहां के केंद्रीय पक्षी अनुसंधान संस्थान (सीएआरआई) का भ्रमण किया। सीएआरआई के निदेशक डॉ. संजीव कुमार ने उन्हें संस्थान में चूजों के निकालने और उनके टीकाकरण को दिखाया। उन्होंने अंडों में मृत व जीवित भ्रूण की पहचान के लिए अपनाई जाने वाली कंडलिंग नाम की नई विधि के बारे में जानकारी दी।
टीम के साथ पहुंचे गवर्निंग बॉडी के सदस्य अखिलेश कुमार ने गिनी फाउल फार्म का भ्रमण किया और उन्होंने वहां मुर्गियों की पर्ल, लैवंडर आदि प्रजातियों के बारे में जानकारी ली। उन्होंने कम लागत में पालने वाली एवं उच्च रोग प्रतिरोधक क्षमता वाली इस मुर्गी के पालन पर जोर दिया। इसके बाद उन्होंने देसी फाउल फार्म में कड़कनाथ, असील कागर, असील पीला, कैरी श्यामा, सिल्की अंकलेश्वर, निकोबारी, नेकेड नेक आदि मुर्गियों से विकसित संकर प्रजाति को देखा। निदेशक डॉ. संजीव कुमार ने बताया कि जहां देशी मुर्गी सालभर में 90 से 100 अंडे देती है, वहीं संस्थान में क्रॉस विधि से विकसित की गई प्रजाति की मुर्गी की अंडा देने की यह क्षमता 180 से 190 तक हैं। अखिलेश कुमार ने मल्टी लेयर कलिफार्निया हाउस में मुर्गियों की अन्य प्रजातियों के बारे में भी जानकारी ली। इसी तरह और बटेर फार्म पर केरी उत्तम, केरी पर्ल, सुनहीर आदि प्रजाति के बारे में पूछताछ की। साथ ही उन्होंने अंडे व मुर्गी के मांस के उत्पाद जैसे एग रसमलाई, बटेर के अंडे का आचार आदि उत्पादों के बारे में भी जानकारी ली।
अलिखेश कुमार ने आईसीएआर के नवीन परिसर का का भी भ्रमण किया और संस्थान की गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए कई सुझाव भी दिए। इस मौके पर डॉ. जगवीर सिंह त्यागी, डॉ. चंद्रहास, डॉ. सिम्मी तोमर, डॉ. चंद्रदेव, डॉ. सुब्रत भांजा सहित कई वैज्ञानिक मौजूद रहे। अखिलेश कुमार ने इसके बाद भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) के भी विभिन्न विभागों का प्रधान वैज्ञानिक डॉ. एके पांडेय के साथ भ्रमण किया।