एसडीएम सदर ने इसकी जांच की थी। मंडलायुक्त कार्यालय में इसके खिलाफ अपील हुई। यहां से केस सुनवाई के लिए एसडीएम कार्यालय को लौटा दिया गया। राजस्व परिषद में अपील हुई तो जांच लखनऊ के एसडीएम सदर को ट्रांसफर हो गई। यह उस समय हुआ, जब अभिषेक प्रकाश खुद लखनऊ के डीएम थे। यह प्रकरण अभी लंबित है और इसमें कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है। इस मामले में स्थानीय अधिकारी भी बोलने से बच रहे हैं।
मांस कारोबारी के साथ भी जुड़ा नाम
बरेली में तैनाती के दौरान एक मांस कारोबारी के साथ भी उनका नाम जुड़ा। स्लॉटर हाउस संचालन में खामियां पाए जाने और इनकी जांच में राहत दिलवाने में उनकी भूमिका चर्चा में रही। आरोप था कि स्लॉटर हाउस में उनकी साझेदारी थी, पर इस बाबत कोई साक्ष्य नहीं मिले।
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प्रतिष्ठान संचालकों को मनमुटाव पड़ा था भारी
बताया जाता है कि कार्यकाल के दौरान अभिषेक प्रकाश की शहर के एक बड़े कपड़ा कारोबारी से मनमुटाव की चर्चा थी। कार्यकाल के दौरान दर्जनभर से ज्यादा विभागों से छापा डलवाने की चर्चा रही। एक निजी अस्पताल को सील कराने को लेकर भी चर्चा में रहे। बताते हैं कि अस्पताल संचालक ने डीएम की कार्यशैली पर सवाल उठाए थे। इसी के बाद कार्रवाई हुई थी।