- मायके वालों ने दहेज हत्या का लगाया था आरोप
बरेली। अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या सात अभिषेक कुमार चतुर्वेदी ने दहेज उत्पीड़न और विवाहिता को आत्महत्या के लिए उकसाने के दोषी पति को पांच साल की कैद और 20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माने की राशि मृतका के पिता को दी जाएगी। जुर्माना अदा न करने पर दोषी को छह माह अतिरिक्त जेल में रहना होगा।
थाना भुता के गांव डबौरा निवासी मूलचंद्र ने मई 2020 में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उन्होंने अपनी बेटी रूबी की शादी दो साल पहले गांव गूंगा निवासी भानू से की थी। शादी के बाद ससुराल वाले दहेज के लिए रूबी को प्रताड़ित करने लगे। पति भानू 50 हजार रुपये की मांग कर रहा था। 16 मई 2020 को ससुराल वालों ने रूबी को पीटा और मिट्टी का तेल डालकर जला दिया। इसके बाद ससुरालियों ने रूबी को पहले एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया और बाद में 15 मई को जिला अस्पताल में भर्ती कराया। बाद में रूबी की मौत हो गई।
विवेचना के बाद पुलिस ने भानु के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। साक्ष्यों और गवाहों के बयान के आधार पर कोर्ट ने भानू को दहेज उत्पीड़न और रूबी को आत्महत्या के लिए उकसाने का दोषी करार देते हुए कैद व जुर्माने की सजा सुनाई। संवाद
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वकील पर हमले के आरोपी पिता-पुत्र की जमानत अर्जी खारिज
बरेली। अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या तीन राकेश त्रिपाठी ने सिटी मजिस्ट्रेट कोर्ट के पास वकील पर हमले के आरोपी पिता-पुत्र की जमानत अर्जी को खारिज कर दिया है।
अधिवक्ता यासिर बेग 30 अगस्त को अपने मुवक्किल पैरवी के लिए जा रहे थे। वह सिटी मजिस्ट्रेट कोर्ट के पास पहुंचे तभी दूसरे पक्ष की पैरवी में आए थाना किला के मलूकपुर निवासी मुन्ना कुरैशी उर्फ सलीम कुरैशी और उसके लड़के ताबिश कुरैशी ने गालियां देने हुए उन पर जानलेवा हमला कर दिया। चाकू से उनके ऊपर कई प्रहार किए। इसमें उसकी गर्दन, सीने और आंखों के आसपास चोट आईं। पिता-पुत्र ने अपने अधिवक्ता के जरिये कोर्ट में जमानत के लिए अर्जी दी थी।
जमानत के पक्ष में तर्क दिया कि यासिर बेग के नजदीकी रिश्तेदारों ने वक्फ की जमीन पर कब्जा कर लिया है। मुन्ना कुरैशी की पत्नी वक्फ जमीन की मुतवल्ली है। उसने मुतवल्ली की हैसियत से कब्जा हटाने का नोटिस दिया था। इसी रंजिश में मुन्ना कुरैशी और उसके बेटे के खिलाफ बढ़ा-चढ़ाकर झूठा मामला दर्ज कराया गया। अभियोजन पक्ष ने मुन्ना कुरैशी के खिलाफ पहले से दर्ज आपराधिक मामलों का रिकाॅर्ड पेश करते हुए जमानत का विरोध किया। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद गुण-दोष के आधार पर पिता-पुत्र की जमानत अर्जी खारिज कर दी। संवाद
दुष्कर्म के आरोपी इमाम की जमानत अर्जी खारिज
बरेली। अपर सत्र न्यायाधीश स्पेशल जज पाॅक्सो एक्ट कोर्ट संख्या एक रामानंद ने धर्मस्थल में बच्ची के साथ दुष्कर्म के आरोपी इमाम की जमानत अर्जी खारिज कर दी है। इमाम मूलरूप से संभल जिले का निवासी है। पिछले 10 साल से किला थाना क्षेत्र के लीचीबाग मोहल्ले की एक मस्जिद में इमामत कर रहा था।
किला थाना क्षेत्र के एक मोहल्ले की रहने वाली महिला ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसकी छह साल की बेटी लीचीबाग के खुर्शीद मेमोरियल स्कूल के पास स्थित बड़ी मस्जिद में इमामत करने वाले हाफिज स्वाले हसन उर्फ इमाम साहेल हसन से धार्मिक ग्रंथ और अरबी पढ़ने जाती थी। वहां इमाम ने बेटी के साथ दुष्कर्म किया। अगले दिन बेटी ने मस्जिद में पढ़ने जाने से इन्कार किया तो उसने बच्ची ने सारी बात बताई। हाफिज स्वाले हसन उर्फ इमाम साहेल हसन मूल रूप से संभल जिले के थाना असमोली के गांव ओवरी सैदपुर का निवासी है। कोर्ट ने इमाम की जमानत अर्जी पर सुनवाई करते हुए दोनों पक्षों के वकीलों के तर्कों को सुनने के बाद गुण-दोष के आधार पर उसकी जमानत अर्जी खारिज कर दी। संवाद