असत्य पर सत्य की विजय का प्रतीक महिषासुर मर्दिनी मां दुर्गा की पूजा को विश्राम दे दिया गया। महादशमी पूजा और सिंदूर उत्सव के साथ दुर्गा पूजा पूरी हो गई। इसके बाद सभी बाड़ियों और पंडालों से दुर्गा प्रतिमा को जुलूस के रूप में राम गंगा ले जाया गया। जहां अस्टी वचन भालो होवे... जयकारे के साथ प्रतिमा का विसर्जन किया गया।
शहर के सभी बंगाली दुर्गा पंडालों और बाड़ियों में सुबह दशमी पूजा हुई। फिर दर्पण विसर्जन की रस्म पूरी की गई। कुछ समय विश्राम के बाद अलग-अलग समय के सिंदूर उत्सव मनाया गया। इसमें महिलाओं ने मां दुर्गा का सिंदूर से वरण किया फिर सभी ने एक दूसरे को सिंदूर लगा कर अगले वर्ष फिर से मां के आने की कामना की।
इस उत्साह और उल्लास भरे माहौल के बीच ट्रक और बसों के साथ जुलूस लेकर मां के भक्त विभिन्न रास्तों से होते हुए राम गंगा पहुंचे। तट पर ढाक, ढोल और नगाड़ों धुन और अस्टी वचन भालो होवे... जयकारों की गूंज के साथ मूर्तियों का विसर्जन किया। वहां से वापस पूजा मंडप आ कर सदस्यों ने शांति जल और आशीर्वाद प्राप्त किया।
इसमें बंगाली एसोसिएशन उत्तर रेलवे मनोरंजन सदन के जुलूस में मनोज राय, यूके मित्रा, शिवेश डे, प्रहलाद राय, संजय दास, डा. श्यामल मित्रा, ध्रुव चटर्जी शामिल रहे। बंगाली क्लब पूर्वोतर रेलवे इंस्टीट्यूट के जुलूस में अध्यक्ष एसके बनर्जी, सचिव अरविंद विश्वास, तारुण ताउत, अंजल बोस, सोवन बनर्जी, श्यामल मुखर्जी आदि मौजूद रहे। इसके अलावा बरेली दुर्गा बाड़ी रामपुर बाग सहित इज्जतनगर के दादू मंदिर, एनई रेलवे इंस्टीट्यूट, एअर फोर्स सहित पंडालों से भी मूर्ति विसर्जन किया।