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कैसे बचेंगे जब पेंटर ही आपको लगाएगा चूना

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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नकली पेंट बनाने वालों ने कई पेंटरों को साधा, मोटे कमीशन में मालिक का करा रहे नुकसान
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शहर के कई इलाकों में चल रहा धंधा, पुलिस तोड़ेगी सिंडीकेट

बरेली। नकली पेंट मामले में किला पुलिस की कार्रवाई से हड़कंप मचा है। पता चला है कि शहर में नकली पेंट व वॉलपुट्टी बनाने और बेचने का धंधा बरसों पुराना है। नामी दुकानदार बताते हैं कि अधिकांश पेंटर ही उन मालिकों को ठगी का शिकार बनाते हैं। वह नकली पेंट बिकवाने के नाम पर मोटा कमीशन मिलता है। वहीं कंपनी के माल में दुकानदार को सौ रुपये प्रति बाल्टी बचाना मुश्किल हो जाता है।
बुधवार को किला पुलिस ने अख्तर नाम के धंधेबाज को पकड़कर नकली पेंट और वॉलपुट्टी बनाने की फैक्टरी पकड़ी थी। सीबीगंज के महेशपुरा में गोदाम किराये पर लेकर आरोपी ने जारा पेंट नाम से फर्म चला रखी थी। हालांकि मौके पर जारा पेंट का नामोनिशान तक नहीं मिला जबकि नेरोलेक, एशियन पेंट, बिरला व्हाइट वॉलपुट्टी व जेके वॉलपुट्टी के नाम से नकली पेंट व पुट्टी का जखीरा बरामद हुआ। पुलिस ने अख्तर से लंबी पूछताछ की। इस धंधे से जुड़े दूसरे नाम भी प्रकाश में आए हैं जहां पुलिस दिवाली बाद दबिश देकर कार्रवाई कर सकती है।
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अमर उजाला से बातचीत में अख्तर ने बताया कि वह अकेले ही यह धंधा नहीं कर रहा। मिलावट के दूसरे धंधों की तरह नकली पेंट बनाने का काम किला, सीबीगंज, श्यामगंज और लाल फाटक में कई जगह होता है। उसका काम नंबर एक का था पर ज्यादा मुनाफे के चक्कर में वह डिमांड पर नामी कंपनियों के उत्पाद बनाने लगा। कहा कि जेल से छूटकर दोबारा ऐसा काम नहीं करेगा। अख्तर ने स्वीकार किया कि कई पेंटरों व पेंट की ठेकेदारी का काम करने वालों से उसके संबंध हैं। उनके कहने पर वह बड़े ऑर्डर तैयार करता था। इसमें उन्हें भी मोटा कमीशन देता था।

व्यवसायी बोले- असली काम के ग्राहक सीमित

सिविल लाइन में खंडेलवाल फर्म से जुड़े रितेश खंडेलवाल ने बताया कि कंपनी का असली पेंट बेचने में बीस लीटर की बाल्टी पर पचास से सौ रुपये तक बचत हो पाती है तो वह पेंटरों को कमीशन कहां से दे सकते हैं। जबकि नकली पेंट के मामले में पेंटर एक बाल्टी पर दुकानदार से पांच सौ रुपये तक कमीशन आराम से पा जाते हैं। वहीं ग्राहकों से पेंट की खाली बाल्टी वह लाकर दे देते हैं और उसके भी सौ से डेढ़ सौ रुपये तक पा लेते हैं। जल्दी ही पेंट खराब हो जाता है तो उन्हें जल्दी काम भी मिल जाता है। मकान मालिक इसमें कंपनी को कोसकर या सीलन आदि को दोष देकर बैठ जाता है पर पेंटर की हरकत का उसे पता ही नहीं होता। खंडेलवाल कहते हैं कि ग्राहक को अच्छी तरह से जानकारी जुटा लेनी चाहिए और प्रतिष्ठित फर्म से ही पेंट आदि खरीदना चाहिए।

कंपनी वालों ने कर लिया किनारा

पुलिस के कई बार बुलाने के बाद भी केवल जेके व बिरला वॉलपुट्टी वाले ही मौके पर पहुंचे। इन्होंने भी यह कहकर रिपोर्ट लिखाने से इंकार कर दिया कि उनकी कंपनी का कोई उत्पाद स्थानीय स्तर पर न तो बनाया और न ही पैक किया जाता है। इसलिए यह माल नकली ही होगा। पुलिस ही इस मामले की सत्यता की जांच करे। तब किला इंस्पेक्टर ने दरोगा धर्मेंद्र सिंह की ओर से अख्तर के खिलाफ रिपोर्ट लिखवा दी। गुरुवार को उसे जेल भेज दिया गया।
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