फरीदपुर। रामदास का 19 लोगों का संयुक्त परिवार 70 वर्गगज के पुश्तैनी मकान में रह रहा है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मदद के लिए परिवार के लोग कई बार आवेदन कर चुके थे, लेकिन उन्हें अभी तक इसका लाभ नहीं मिल सका है।
आर्थिक तंगी से जूझ रहा परिवार आवास योजना के तहत मदद पाने के लिए पात्रता भी रखता है, लेकिन ब्लॉक के अधिकारियों एवं कर्मचारियों की उदासीनता के चलते उनको लाभ नहीं मिल सका। इसी वजह से परिवार झोंपड़ी डालकर रहने को मजबूर है। यही झोंपड़ी चारों मासूमों के लिए काल साबित हुई। मौके पर पहुंचे फरीदपुर विधायक डॉ. श्याम बिहारी लाल ने परिवार की स्थिति देखी तो वह भी भावुक हो गए। परिवार के लोगों ने उन्हें रोते हुए बताया कि वे आर्थिक तंगी की वजह से मकान नहीं बनवा पा रहे हैं।
उन्होंने कई बार ब्लॉक में आवेदन किया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। वहां खड़े ब्लॉक के अधिकारी व ग्राम पंचायत अधिकारी कुलदीप पांडेय से विधायक ने आवास के बारे में जानकारी मांगी तो उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवार का नाम आवास योजना के तहत सूची में ही नहीं है। पीड़ित परिवार का दर्द सुनकर विधायक ने ब्लॉक के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को फटकार लगाई।
एक दिन पहले घर में गूंजी थी किलकारी, अब मातम
रामदास के घर में उनके अलावा उनकी पत्नी, चार बेटे, तीन बहू व दस पोते-पोतियों समेत कुल 19 लोग रहते थे। इनमें से चार बच्चियों की मौत हो चुकी है। अमिताभ के एक बेटा व चार बेटियां थीं। उनकी सबसे छोटी व मंझली बेटी की मौत हो गई। भीम की दो बेटियों में बड़ी बेटी की मौत हो गई। अर्जुन की एक ही बेटी थी, जिसकी मौत हो गई। अर्जुन की चार वर्ष पूर्व हादसे में मौत हो गई थी। परिजनों ने अर्जुन की पत्नी की शादी अर्जुन के भाई सुखवीर से करा दी। सुखवीर की एक बेटी है। उसकी एक बेटी ने बृहस्पतिवार शाम को जन्म लिया। बृहस्पतिवार को घर में किलकारी गूंजने से खुशी का माहौल था। शुक्रवार को चार बच्चियों की मौत से परिवार में मातम छा गया।