बरेली। सरकारी अस्पतालों में संसाधनों की उपलब्धता के बावजूद मरीजों को बेहतर सेवाएं नहीं मिल पा रही हैं। शिकायतों का संज्ञान लेकर अब शासन स्तर से ही निगरानी की व्यवस्था हो रही है। अस्पताल के 16 चिह्नित स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगेंगे। इसके जरिये मरीजों के पंजीकरण, जांच व इलाज पर शासन की पैनी नजर रहेगी। अव्यवस्था पर कार्रवाई हो सकती है।
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा के निदेशक प्रशासन डॉ. राजा गणपति आर. की ओर से मुख्य चिकित्सा अधिकारी को गाइडलाइन भेजी गई है। बताया है कि लखनऊ महानिदेशालय में आईसीसीसी (इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर) स्थापित हुआ है। निर्धारित 16 सर्विस प्वॉइंट के लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त होगा। किसी प्वॉइंट पर कोई विसंगति मिलती है तो उसकी सूचना नोडल अधिकारी को दी जाएगी। वहां से व्यवस्था में सुधार न हुआ तो उच्चाधिकारी उसे अटेंड करेंगे। कैमरे इमरजेंसी वार्ड, जनरल वार्ड, ओपीडी, आईसीयू, एसएनसीयू, रजिस्ट्रेशन काउंटर, आईपीडी, लैब, प्रवेश द्वार, ऑपरेशन थिएटर, लेबर रूम नर्स काउंटर, एक्स-रे काउंटर, ब्लड बैंक, फार्मेसी सर्विस प्वाॅइंट पर लगेंगे।
जिला पुरुष और महिला अस्पताल में आए दिन ओपीडी में बेहतर इलाज न मिलने, स्टाफ नर्स द्वारा राउंड न लगाए जाने, सफाई का अभाव, काउंटर पर कर्मचारी के गायब रहने, ओपीडी से डॉक्टर के गायब रहने, ओटी में तीमारदारों से रुपये मांगने, लैब में अव्यवस्था के आरोप लगते रहते हैं। अब सीसीटीवी कैमरे लगने के बाद मरीज और स्टाफ दोनों की हरकतें कैद होंगी। शिकायत पर फुटेज के जरिये सुबूत देखे जाएंगे।
अमर उजाला ने दिखाई तस्वीर तो सुधरी व्यवस्था
पिछले दिनों जिला अस्पताल की ओपीडी और जनरल वार्ड में कुत्ते घूम रहे थे। अमर उजाला ने इसकी तस्वीर प्रमुखता से प्रकाशित की तो प्रमुख सचिव ने सीएमएस को व्यवस्था सुधारने, लापरवाह स्टाफ को चिह्नित कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए। मामले में एक स्टाफ नर्स हटाया गया। एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के खिलाफ निलंबन की संस्तुति हुई थी।
स्टाफ की उपस्थिति और गतिविधि, स्ट्रेचर, व्हीलचेयर की उपलब्धता, बायोमेडिकल वेस्ट का निस्तारण, सफाई और गार्ड उपस्थिति, चिकित्सकों का आचरण, परिसर में छुट्टा पशु तो नहीं घूम रहे, ऑक्सीजन सिलिंडर की उपलब्धता, तीमारदारों की संख्या आदि की निगरानी की जाएगी।
शासन के निर्देश मिले हैं। उसके आधार पर व्यवस्था की जा रही है। कहीं गड़बड़ी हुई तो नियमानुसार कार्रवाई के लिए रिपोर्ट निदेशालय को भेजी जाएगी। - डॉ. बलवीर सिंह, सीएमओ